All India tv news। पहाड़ों की शांत वादियां, पवित्र नदियां और आध्यात्मिक सुकून—यही पहचान है हमारी देवभूमि उत्तराखंड की। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी शांति की आड़ में 'नशे का सफेद जहर' हमारी युवा पीढ़ी की जड़ों को खोखला कर रहा है? जिसे युवा एक बार 'मजे' के लिए शुरू करते हैं, वह सफर बहुत जल्द जेल की कालकोठरी और जिंदगी की बर्बादी पर जाकर खत्म होता है। आज हम बात करेंगे देवभूमि पर मंडराते उस काले साये की, जिसने हजारों परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं।
शुरुआत एक 'शौक' से:-
देवभूमि के युवाओं में नशे का चलन अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह दूर-दराज के गांवों तक भी पहुंच चुका है। शुरुआत होती है दोस्तों के साथ 'सिर्फ एक बार' ट्राई करने से, जिसे अक्सर 'मजा' या 'टशन' का नाम दिया जाता है।
स्मैक और ड्रग्स का जाल :-
मीडिया रिपोर्ट में मिले हालिया आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में स्मैक, चरस और प्रतिबंधित नशीली दवाओं का कारोबार तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 में ही पुलिस ने 3.10 करोड़ रुपये की स्मैक के साथ अंतरराज्यीय तस्करों को दबोचा है। नशे के सौदागरों ने अब स्कूली छात्रों और कॉलेज जाने वाले युवाओं को अपना मुख्य निशाना बनाया है।
सरकार का कड़ा प्रहार :-
हालात की गंभीरता को देखते हुए धामी सरकार ने 'ड्रग फ्री देवभूमि 2025' अभियान को और तेज कर दिया है। हाल ही में उत्तराखंड कैबिनेट ने एक समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के लिए 22 नए पदों को मंजूरी दी है, ताकि ड्रग नेटवर्क को जड़ से उखाड़ा जा सके।
बर्बादी का मंजर:-
जो युवा इस दलदल में फंसते हैं, उनके पास केवल दो ही रास्ते बचते हैं—या तो जेल की सलाखें या फिर नशा मुक्ति केंद्र की चारदीवारी। कई मामलों में तो नशे की ओवरडोज सीधे श्मशान तक ले जा रही है। परिवारों की जमा-पूंजी इलाज में खत्म हो रही है और देवभूमि का भविष्य धुंधला पड़ता जा रहा है।
नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समाज को खत्म करता है। अगर आपके आसपास कोई नशा बेच रहा है या कोई युवा इसकी चपेट में है, तो चुप न रहें। पुलिस को सूचना दें और अपने बच्चों पर नजर रखें। याद रखिए, 'मजे' की ये चंद सेकंड्स आपकी पूरी जिंदगी को सलाखों के पीछे धकेल सकती हैं। इसलिए सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

