All India tv news। आज देश के कृषि जगत से एक बेहद मीठी और गौरवशाली खबर सामने आ रही है। उत्तराखंड के बागानों की मिठास अब सात समंदर पार यूरोपीय बाजारों में घुलने लगी है। अपनी खास खुशबू, गहरे लाल रंग और बेहतरीन स्वाद के लिए मशहूर देहरादून की प्रीमियम लीची की पहली वाणिज्यिक खेप सफलतापूर्वक इटली (Italy) पहुंच चुकी है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और एपीडा (APEDA) के सहयोग से उठाए गए इस कदम ने भारतीय कृषि शक्ति को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी है। इस ऐतिहासिक शुरुआत से न सिर्फ उत्तराखंड के फलों का डंका यूरोप में बज रहा है, बल्कि स्थानीय किसानों की किस्मत भी चमक उठी है, जिन्हें घरेलू बाजार के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत तक अधिक दाम मिल रहे हैं।
यह सिर्फ एक फल का निर्यात नहीं है, बल्कि देवभूमि के अन्नदाताओं की कड़ी मेहनत, आधुनिक पैकेजिंग तकनीक और वैश्विक बाजार में बढ़ते भारत के विश्वास की एक नई गाथा है। सालों से देश की राजधानी से लेकर गली-मोहल्लों तक अपनी सोंधी सुगंध बिखेरने वाली देहरादूनी लीची ने अब सीधे यूरोप के दिल यानी इटली में दस्तक दे रहा है।
लीची एक बेहद नाजुक फल माना जाता है, जो पेड़ से टूटने के बाद तेजी से अपनी गुणवत्ता खोने लगता है। लेकिन इस बार, आधुनिक कोल्ड चेन सिस्टम और विशेष पैकेजिंग तकनीक की मदद से इस चुनौती को एक बड़े अवसर में बदल दिया गया। केंद्रीय एजेंसी 'एपीडा' और उत्तराखंड सरकार के समन्वित प्रयासों से एक मीट्रिक टन (1000 किलोग्राम) ताजी लीची को विशेष रूप से पैक करके हवाई मार्ग के जरिए इटली भेजा गया है।
आपको बता दें कि देहरादून का यह इलाका अपनी विशेष किस्मों जैसे—'रोज सेंटेड', 'कलकत्तिया' और 'बेदाना' के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। उत्तराखंड की बेजोड़ जलवायु के कारण देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर जिलों में उगने वाली यह लीची अपने अधिक गूदे और मिठास के कारण यूरोपीय मानकों पर पूरी तरह खरी उतरी है।
इस अंतरराष्ट्रीय निर्यात का सबसे बड़ा और सीधा फायदा उत्तराखंड के स्थानीय बागवानों को हुआ है। बिचौलियों के चंगुल और स्थानीय बाजारों में कम कीमतों की मजबूरी से हटकर, इस बार किसानों को सीधे 25% अधिक मूल्य हासिल हुआ है। साफ है कि स्थानीय बागानों से शुरू हुआ यह सफर अब भारत की कृषि शक्ति का वैश्विक विस्तार बन चुका है।
निश्चित रूप से, इटली में देहरादूनी लीची का पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि अगर हमारे किसानों को सही तकनीक और अंतरराष्ट्रीय बाजार का मंच मिले, तो भारतीय उत्पाद दुनिया के किसी भी कोने में अपनी धाक जमा सकते हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड के अन्य फल और उत्पाद भी इसी तरह वैश्विक बाजारों की रौनक बढ़ाएंगे।



