All India tv news। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से इस वक्त की एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। देवभूमि में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब इस कदर बढ़ गया है कि इसका सीधा असर मासूम बच्चों की शिक्षा पर पड़ने लगा है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मौलेखाल के अंतर्गत आने वाले तल्ला सल्ट क्षेत्र से एक बड़ी खबर है, जहां बाघ की लगातार सक्रियता के कारण ग्रामीणों में भारी दहशत है।
सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए प्रशासन और ग्रामीणों की सहमति के बाद क्षेत्र के तीन सरकारी स्कूलों को फिलहाल बंद रखने का फैसला लिया गया है। जिन स्कूलों में नियमित कक्षाएं रोकी गई हैं, उनमें राजकीय प्राथमिक विद्यालय घजीरा, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौरड़ा और राजकीय जूनियर हाईस्कूल घजीरा शामिल हैं।
उत्तराखंड का अल्मोड़ा जिला इन दिनों बाघ और गुलदार के आतंक से कांप रहा है। तल्ला सल्ट क्षेत्र की तड़म ग्रामसभा और उसके आसपास के गांवों में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोग दिन के उजाले में भी घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं। सड़कों और रास्तों पर बाघ की लगातार मौजूदगी ने अब बच्चों के कदम स्कूलों की तरफ बढ़ने से रोक दिए हैं।
अभिभावकों की चिंता और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय घजीरा, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौरड़ा और राजकीय जूनियर हाईस्कूल घजीरा में हालात सामान्य होने तक नियमित रूप से स्कूल न खोलने का निर्णय लिया गया है।
लेकिन सवाल यह था कि स्कूल बंद होने के बाद बच्चों के भविष्य और उनकी पढ़ाई का क्या होगा? इसके समाधान के लिए शिक्षकों और ग्रामीणों के बीच एक अहम बैठक हुई, जिसमें सहमति बनी है कि जब तक वन विभाग इस क्षेत्र को सुरक्षित घोषित नहीं कर देता, तब तक बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाया जाएगा।
उत्तराखंड के पहाड़ों में यह कोई पहली घटना नहीं है। लगातार बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन तो हो ही रहा है, और अब यह संकट बुनियादी शिक्षा तंत्र को भी अपनी चपेट में ले रहा है। हालांकि ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प चुना गया है, लेकिन पहाड़ों में कमजोर इंटरनेट नेटवर्क के बीच यह व्यवस्था कितनी कारगर होगी, यह भी एक बड़ा सवाल है।
फिलहाल, ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में तुरंत पिंजरा लगाने और गश्त बढ़ाने की मांग की है ताकि बच्चों को फिर से सुरक्षित माहौल मिल सके।

