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राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

स्कूलों में प्रतिदिन गूंजेंगे भगवद् गीता के श्लोक, सरकार ने छात्रों में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना के विकास का खाका खींचा।

 


All India tv news। केंद्र सरकार ने देश भर के स्कूलों में एक महत्वपूर्ण शैक्षिक और सांस्कृतिक पहल शुरू करने की योजना बनाई है, जिसके तहत छात्रों के दैनिक कार्यक्रम में भगवद् गीता के श्लोकों का पाठ शामिल किया जाएगा। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी में नैतिक मूल्यों को स्थापित करना, उनके भावनात्मक कल्याण को सुनिश्चित करना और उनमें सांस्कृतिक जागरूकता की भावना को बढ़ावा देना है।

इस नई नीति के तहत, स्कूलों में सुबह की सभा या किसी अन्य निर्धारित समय पर, छात्रों द्वारा भगवद् गीता के चुनिंदा श्लोकों का सामूहिक पाठ किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कदम बच्चों को भारतीय दर्शन और प्राचीन ज्ञान से जोड़ने में मदद करेगा, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान करता है।

प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि गीता के उपदेश, जो कर्तव्य (धर्म), नैतिकता और जीवन के उद्देश्य पर केंद्रित हैं, छात्रों को अनुशासन, सम्मान और जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल सिखा सकते हैं। सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल शैक्षणिक वातावरण को समृद्ध करेगी बल्कि छात्रों को तनाव और आधुनिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त भी बनाएगी।

हालांकि, इस योजना को लेकर देश में विभिन्न शैक्षिक और राजनीतिक हलकों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ शिक्षाविदों और अभिभावक समूहों ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे भारतीय विरासत की ओर एक सकारात्मक कदम बताया है, जबकि अन्य लोगों ने धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का हवाला देते हुए स्कूलों में किसी विशेष धार्मिक ग्रंथ के पाठ पर चिंता व्यक्त की है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस पहल का उद्देश्य किसी धर्म विशेष का प्रचार करना नहीं, बल्कि एक सार्वभौमिक नैतिक संहिता और जीवन दर्शन को साझा करना है। इस योजना को लागू करने के लिए जल्द ही विस्तृत दिशानिर्देश और एक पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा, जिसमें उन श्लोकों का चयन किया जाएगा जो सभी समुदायों के छात्रों के लिए प्रासंगिक और स्वीकार्य हों।

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