All India tv news। हल्द्वानी शहर में इन दिनों आवारा और पालतू कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आम जनता का सड़कों पर निकलना दूभर हो गया है। नगर निगम हल्द्वानी के लिए यह समस्या एक बड़ी चुनौती और 'टेंशन' बन चुकी है। ताज़ा आंकड़ों और घटनाओं ने प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खौफनाक आंकड़े:- रोजाना 40 से ज्यादा मामले
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक) के मात्र 10 महीनों में कुत्ते के काटने के 12,176 मामले सामने आए हैं।
औसत:- शहर में रोजाना औसतन 40 से 50 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं।
जनवरी 2026:- इस महीने अब तक 1,239 लोगों को कुत्तों ने अपना निशाना बनाया है।
अस्पताल की स्थिति:- हल्द्वानी के बेस अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) लगवाने वालों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिनमें बच्चों की संख्या काफी अधिक है।
वार्ड 48 और पॉलीशीट में 'तांडव' :-
हाल ही में शहर के वार्ड 48 (मल्ली बमौरी) और पॉलीशीट इलाकों में एक ही हमलावर कुत्ते ने जमकर आतंक मचाया।
48 घंटे, 15 शिकार:- पिछले 48 घंटों के भीतर बलवंत कॉलोनी, बल्यूटिया फार्म और लक्ष्मी विहार जैसे क्षेत्रों में एक कुत्ते ने करीब 15 लोगों को लहूलुहान कर दिया।
बुजुर्ग महिला पर हमला:- सीसीटीवी में कैद एक घटना में, बच्चे को स्कूल बस तक छोड़ने गई बुजुर्ग महिला गीता पंत पर कुत्ते ने पीछे से जानलेवा हमला कर दिया।
पार्षद के भाई भी घायल:- स्थानीय पार्षद मुकुल बल्यूटिया के भाई विनीत बल्यूटिया की नाक और चेहरे को कुत्ते ने बुरी तरह नोंच दिया, जिसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
नगर निगम की कार्रवाई और चुनौतियां :-
बढ़ते दबाव के बाद नगर आयुक्त पारितोष वर्मा ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कदमों की घोषणा की है:
नया शेल्टर हाउस:- नगर निगम जल्द ही 250 कुत्तों की क्षमता वाला अपना खुद का शेल्टर हाउस तैयार करने जा रहा है।
नसबंदी अभियान:- नगर आयुक्त के अनुसार, अब तक शहर के करीब 20,000 कुत्तों की नसबंदी (Sterilization) की जा चुकी है।
अनिवार्य पंजीकरण:- पालतू कुत्तों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल शुरू किया गया है। अब तक 4,500 कुत्तों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। बिना रजिस्ट्रेशन वाले कुत्तों के मालिकों पर 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
जनता में आक्रोश :-
स्थानीय निवासियों और पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम की 'डॉग कैचर' टीम सूचना के घंटों बाद पहुंचती है और अक्सर खाली हाथ लौट आती है। लोगों का कहना है कि जब तक सड़कों से खूंखार कुत्तों को स्थाई रूप से नहीं हटाया जाता, तब तक दहशत का माहौल बना रहेगा।

