All India tv news। उत्तराखंड की राजनीति और परिवहन जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश सरकार के एक आदेश ने पहाड़ के टैक्सी चालकों में उबाल पैदा कर दिया है। सरकार के 'तुगलकी फरमान' के विरोध में कुमाऊँ मंडल के हजारों टैक्सी चालकों ने आज भारतीय जनता पार्टी से सामूहिक इस्तीफा देकर सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
पूरा मामला वाहनों की फिटनेस को लेकर जारी नए आदेश से जुड़ा है। शासन ने आदेश जारी किया है कि अब उत्तराखंड के समस्त वाहनों की फिटनेस उनके निकटतम ATS (Automated Testing Station) केंद्र में ही करानी अनिवार्य होगी।
टनकपुर में जुटी टैक्सी यूनियनें:-
इस आदेश के विरोध में कुमाऊँ मंडल टैक्सी महासंघ के बैनर तले टनकपुर में एक विशाल बैठक का आयोजन किया गया। महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठाकुर ने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों को समझे बिना ऐसे फैसले ले रही है, जिससे परिवहन व्यवसायियों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
भाजपा को बड़ा झटका:-
नाराजगी इस कदर है कि टैक्सी यूनियनों ने आज भाजपा के सभी जिलाध्यक्षों को पत्र लिखकर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिकता में इस्तीफा दे दिया है। चालकों का कहना है कि जो सरकार उनके हितों की रक्षा नहीं कर सकती, वे उस पार्टी के साथ नहीं रहेंगे।
केंद्रीय मंत्री के आश्वासन का नहीं हुआ असर:-
महासंघ ने खुलासा किया कि बीते 9 जनवरी को उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा से दिल्ली में मुलाकात की थी। मंत्री जी ने 2 दिन में समस्या समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन आज 20 दिन बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
बड़ा फैसला:- मांगों को लेकर 31 जनवरी से प्रदेश भर में चक्काजाम और 'प्रदेश बंद' का आह्वान।
मुख्य मांग:- पूर्व की भांति सुलभ तरीके से कराई जाए वाहनों की फिटनेस।
चेतावनी:- जब तक आदेश वापस नहीं होता, एक भी टैक्सी का पहिया नहीं घूमेगा।
अगर सरकार ने जल्द ही इस मामले में दखल नहीं दिया, तो 31 जनवरी से उत्तराखंड की सड़कों पर सन्नाटा पसर सकता है और पर्यटकों समेत आम जनता को भारी किल्लत झेलनी पड़ सकती है।


