All India tv news। देश की सर्वोच्च अदालत ने छात्राओं के स्वास्थ्य और गरिमा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब देश के हर स्कूल में छात्राओं के लिए निःशुल्क सैनिटरी पैड और अलग टॉयलेट की सुविधा होना अनिवार्य है। अदालत ने चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों की मान्यता तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की मुख्य बातें:-
अनिवार्य सुविधाएं:- सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में छात्राओं के लिए साफ-सुथरे अलग शौचालय होना अनिवार्य है।
फ्री पैड का वितरण:- मासिक धर्म स्वच्छता के तहत छात्राओं को स्कूल परिसर में ही मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने होंगे।
सख्त कार्रवाई:+ यदि कोई निजी स्कूल इन मानकों को पूरा नहीं करता है, तो राज्य सरकारें और शिक्षा विभाग उनकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई करेंगे।
डिस्पोजल की सुविधा:- कोर्ट ने स्कूलों में इस्तेमाल किए गए पैड्स के निपटान के लिए उचित डस्टबिन और व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए हैं।
अदालत ने क्यों कड़ा किया रुख?
सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सुविधाओं के अभाव में बड़ी संख्या में छात्राएं स्कूल छोड़ देती हैं। मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता की कमी और बुनियादी ढांचे का न होना शिक्षा के अधिकार के खिलाफ है। कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे 2026 के शैक्षणिक सत्र तक इन सुविधाओं को हर हाल में सुनिश्चित करें।
शिक्षा जगत में खलबली :-
इस फैसले के बाद अब सभी निजी स्कूलों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा करनी होगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल छात्राओं की स्कूल में उपस्थिति बढ़ेगी, बल्कि उनके स्वास्थ्य के स्तर में भी सुधार होगा।

