All India tv news। देवभूमि उत्तराखंड को झकझोर देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग अब भावनात्मक रूप से और भी तीव्र हो गई है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की दो नाबालिग बहनों ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपने खून से एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर यह सवाल उठाया है कि "क्या एक आम लड़की की जान इतनी सस्ती है और क्या V.I.P. लोगों को अपराध करने की छूट है?"
कक्षा 10 की छात्रा अंजना और उसकी बहन द्वारा लिखा गया यह मार्मिक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इसने एक बार फिर इस बहुचर्चित मामले में न्याय की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पत्र में उठाए गए गंभीर सवाल:-
पत्र में, जिसे पूरी तरह से खून से लिखा गया है, छात्राओं ने अंकिता भंडारी के साथ हुई घटना और उसके बाद "न्याय में हो रही देरी" पर अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने राष्ट्रपति से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का निवेदन किया है।
पत्र का मुख्य अंश है: "क्या एक आम लड़की की जान इतनी सस्ती है या V.I.P. लोगों को अपराध करने की छूट है?"
उन्होंने राष्ट्रपति को भारत का प्रथम नागरिक और एक महिला व अभिभावक बताते हुए सभी दोषियों—चाहे वे आम इंसान हों या V.I.P.—को सख्त सज़ा दिलवाने की मांग की है।
जनता में आक्रोश:-
यह पत्र राज्य के युवाओं और महिलाओं में बढ़ते आक्रोश को दर्शाता है, जो महसूस करते हैं कि राजनीतिक दबाव या V.I.P. स्टेटस के कारण मामले की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। छात्राओं ने यह पत्र अपने पूरे होशोहवास में लिखा है, जो न्याय के प्रति उनकी गंभीरता को उजागर करता है।
पत्र का अंत इस शक्तिशाली संदेश के साथ होता है: "भारत माता की बेटियों को सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है।"
इस खून से लिखे पत्र ने प्रशासन और न्यायपालिका पर दबाव बढ़ा दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंकिता भंडारी मामले में निष्पक्ष और त्वरित न्याय हो सके।



