All India tv news। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, जिसे कभी शांत और सुरक्षित माना जाता था, अब अपराध की नगरी बनती जा रही है। ताज़ा मामला वरिष्ठ पत्रकार और जय भारत टीवी के स्थानीय संपादक हेम भट्ट का है, जिन पर कल शाम सरेराह जानलेवा हमला किया गया। हमलावरों ने न केवल उनके साथ मारपीट की, बल्कि बेखौफ अंदाज में धमकी दी कि "अगर खबर चलाई तो जान से मार देंगे।"
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार घटना शुक्रवार शाम, 6 फरवरी 2026 की है। जय भारत टीवी के वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट जब अपने कार्यालय से घर की ओर जा रहे थे, तभी MKP PG कॉलेज चौक के पास बाइक सवार तीन युवकों ने उनका पीछा करना शुरू किया। रेस कोर्स रोड पर पहुँचते ही हमलावरों ने उनकी बाइक रुकवाई और उन पर हमला बोल दिया।
हेम भट्ट ने डालनवाला पुलिस चौकी में दी गई अपनी तहरीर में स्पष्ट किया है कि यह हमला उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता और सच्चाई दिखाने के कारण हुआ है। हमले के बाद घायल पत्रकार को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका उपचार चल रहा है।
असुरक्षित होती राजधानी:-
यह घटना देहरादून में गिरती कानून-व्यवस्था का इकलौता उदाहरण नहीं है। पिछले कुछ दिनों में अपराधों की बाढ़ सी आ गई है:
यह घटना देहरादून में गिरती कानून-व्यवस्था का इकलौता उदाहरण नहीं है। पिछले कुछ दिनों में अपराधों की बाढ़ सी आ गई है:
- महिला कांग्रेस नेता पर हमला:- कल ही देहरादून के एक कैफे में महिला कांग्रेस की युवा कार्यकर्ता पर तीन युवकों ने चापड़ से हमला किया, जिसमें उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और 8 टांके लगे हैं।
- गुंजन हत्याकांड:- महज कुछ दिन पहले, 2 फरवरी को पलटन बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में गुंजन नाम की युवती की दिनदहाड़े चापड़ से गला काटकर हत्या कर दी गई थी।
- सुरक्षा पर सवाल:- हाल ही में एक गैर-सरकारी संस्था (NGO) ने देहरादून को महिलाओं के लिए असुरक्षित बताया था, जिस पर पुलिस सफाई देने में जुटी रही, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल:-
शहर में बढ़ते अपराधों ने जनता और पत्रकार जगत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पुलिस पर आरोप लग रहे हैं कि वह वीआईपी मूवमेंट, धरनों और रैलियों की ड्यूटी में इतनी व्यस्त है कि आम नागरिकों और पत्रकारों की सुरक्षा हाशिए पर चली गई है।
शहर में बढ़ते अपराधों ने जनता और पत्रकार जगत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पुलिस पर आरोप लग रहे हैं कि वह वीआईपी मूवमेंट, धरनों और रैलियों की ड्यूटी में इतनी व्यस्त है कि आम नागरिकों और पत्रकारों की सुरक्षा हाशिए पर चली गई है।
पत्रकार संगठनों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि देहरादून पुलिस सक्रिय होकर न केवल उन तीन हमलावरों को गिरफ्तार करे, बल्कि उस 'आका' का भी पर्दाफाश करे जिसके इशारे पर सच की आवाज को दबाने की कोशिश की गई है।

