All India tv news। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच इन दिनों 'आर-पार' की जंग छिड़ गई है। वजह है—प्रदेश के सरकारी स्कूलों के लिए जारी की गई नई समय सारणी।
शासन ने स्कूलों में पढ़ाई का समय बढ़ाने का आदेश क्या दिया, पूरे प्रदेश के शिक्षक संगठन लामबंद हो गए हैं। राजकीय शिक्षक संघ ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि यह 'तुगलकी फरमान' वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेश भर के शिक्षक सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को दरकिनार कर लागू किए गए इस नए आदेश ने विवादों का बवंडर खड़ा कर दिया है। शिक्षकों का तर्क है कि पहाड़ों में धूप, जंगली जानवरों का खतरा और लंबी दूरी को देखते हुए समय बढ़ाना अव्यावहारिक है।
मुख्य बिंदु जो शिक्षक उठा रहे हैं:-
भौगोलिक परिस्थितियाँ: पहाड़ों में शाम जल्दी ढल जाती है, जिससे बच्चों और महिला शिक्षकों को घर पहुँचने में असुरक्षा का सामना करना पड़ेगा।
उत्पीड़न की चेतावनी: राजकीय शिक्षक संघ का कहना है कि यदि इस आदेश की आड़ में किसी भी शिक्षक का उत्पीड़न किया गया, तो विभाग को इसका भारी खामियाजा भुगतना होगा।
एकजुटता: सभी शिक्षक संगठनों ने एक सुर में इस आदेश को वापस लेने की मांग की है।
शिक्षक संघ का बयान:-
"हम शिक्षा की गुणवत्ता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विभाग को जमीनी हकीकत समझनी होगी। जबरन थोपे गए फैसले हमें आंदोलन के लिए मजबूर कर रहे हैं।"

