expr:class='data:blog.pageType' id='mainContent'>

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

साहित्य जगत में उत्तराखंड का गौरव: प्रो. मंजुला राणा की कहानी 'डॉलर' को मिला 'हिंदी की सर्वश्रेष्ठ कहानी' का सम्मान।

 


All India tv news। देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक मंच 'साहित्योत्सव-2026' में उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. मंजुला राणा ने अपनी लेखनी का लोहा मनवाया है। नई दिल्ली के रवींद्र भवन परिसर में आयोजित इस भव्य समारोह में प्रो. राणा की चर्चित कहानी ‘डॉलर’ को हिंदी की सर्वश्रेष्ठ कहानी के रूप में चुना गया।

प्रमुख बिंदु:-

भव्य आयोजन:- साहित्य अकादमी द्वारा 30 मार्च से 4 अप्रैल 2026 तक आयोजित इस उत्सव में देशभर के 650 से अधिक प्रतिष्ठित लेखकों और विद्वानों ने शिरकत की।

मार्मिक प्रस्तुति:- प्रो. मंजुला राणा ने पद्म भूषण और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित डॉ. प्रतिभा रॉय की गरिमामयी उपस्थिति में अपनी कहानी का वाचन किया। समकालीन सामाजिक यथार्थ और बिखरती पारिवारिक संवेदनाओं को उकेरती इस कहानी ने श्रोताओं और विद्वानों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बड़ी उपलब्धि:- 50 से अधिक भारतीय भाषाओं के प्रतिनिधित्व वाले इस उत्सव के 100 से अधिक सत्रों के बीच 'डॉलर' को उत्कृष्ट सम्मान मिलना हिंदी कथा-साहित्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

कौन हैं प्रो. मंजुला राणा?

प्रो. मंजुला राणा वर्तमान में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। वे न केवल एक प्रतिष्ठित कहानीकार हैं, बल्कि लंबे समय से साहित्य अकादमी से जुड़ी रही हैं और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की सदस्य के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएँ दे चुकी हैं।

प्रतिक्रिया:-

इस सम्मान पर खुशी जाहिर करते हुए प्रो. राणा ने कहा, "यह मेरे लिए सौभाग्य का क्षण है कि 'डॉलर' को साहित्य के इतने बड़े विद्वानों ने सराहा। यह सम्मान मेरी लेखनी के साथ-साथ हिंदी की समृद्ध परंपरा का सम्मान है।"

इस उपलब्धि से न केवल गढ़वाल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे उत्तराखंड के साहित्यिक गलियारों में हर्ष की लहर है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.