All India tv news। उत्तराखंड में इन दिनों एलपीजी गैस की भारी किल्लत ने आम जनता से लेकर व्यापारियों तक के पसीने छुड़ा दिए हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि देवभूमि के ढाबों और होटलों के चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं। आलम यह है कि जायके के लिए मशहूर उत्तराखंड के ढाबों से अब 70 प्रतिशत व्यंजन गायब हो चुके हैं।
उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्रों और हाईवे किनारे स्थित ढाबों पर सन्नाटा पसरने लगा है। गैस सप्लाई बाधित होने के कारण होटल संचालकों ने अपने मेन्यू कार्ड को छोटा कर दिया है। तली-भुनी चीजें और ज्यादा गैस खपत वाले पकवान अब थाली से नदारद हैं। मजबूरी में अब रसोई चलाने के लिए इंडक्शन चूल्हों और कोयले का सहारा लिया जा रहा है, जिससे खाने का स्वाद और लागत दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
मुख्य बिंदु :-
70% व्यंजन मेन्यू से बाहर:- होटल संचालकों के पास सीमित गैस बची है, इसलिए सिर्फ जरूरी खाना ही बन रहा है।
पर्यटन पर असर:- गैस संकट का सीधा असर चारधाम मार्ग और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पड़ रहा है।
विकल्प की तलाश:- बिजली के महंगे इंडक्शन और धुएं वाले कोयले ने रसोइयों की मुश्किल बढ़ा दी है।
संकट को गहराता देख मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। सीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक इमरजेंसी टीम का गठन किया है और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि गैस की सप्लाई चेन को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि आम जनता और व्यापारियों को राहत मिल सके।

