expr:class='data:blog.pageType' id='mainContent'>

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

अब पेरेंट्स के हाथ में होगी स्कूल की कमान! केंद्र सरकार के 15 लाख स्कूलों के लिए बनेगा 3 साल का मास्टर प्लान।

 



All India tv news। शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। अब आपके बच्चे के स्कूल का बजट और वहां होने वाला विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आप खुद इसे तय करेंगे। केंद्र सरकार देश के करीब 15 लाख स्कूलों की सूरत बदलने के लिए एक नई योजना लेकर आई है, जिसमें माता-पिता की भूमिका सबसे अहम होने वाली है।
 क्या है नई योजना?
केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि अब सरकारी स्कूलों के विकास की बागडोर 'स्कूल मैनेजमेंट कमेटी' (SMC) के हाथों में होगी, जिसमें मुख्य रूप से बच्चों के माता-पिता शामिल होते हैं। अब स्कूल का बजट कहाँ खर्च होगा और स्कूल में कौन सी सुविधाएं पहले आएंगी, इसका फैसला अभिभावक खुद करेंगे।
 बनेगा 3 साल का 'मास्टर प्लान' :-
सिर्फ एक साल नहीं, बल्कि अब हर स्कूल के लिए 3 साल का एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इस प्लान में यह तय होगा कि अगले तीन वर्षों में स्कूल की बिल्डिंग, लैब, खेल के मैदान और शिक्षा की गुणवत्ता को कैसे बेहतर बनाया जाए।
 15 लाख स्कूलों का होगा कायाकल्प :-
इस नई नीति का असर देश के करीब 15 लाख सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों पर पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य है कि स्थानीय स्तर पर माता-पिता को जोड़कर स्कूलों में पारदर्शिता लाई जाए और फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए।
 अभिभावकों को मिलेंगी ये शक्तियां:-
  • स्कूल के फंड और बजट का हिसाब-किताब देखना।
  • स्कूल की बुनियादी जरूरतों (जैसे पानी, बिजली, शौचालय) को प्राथमिकता देना।
  • बच्चों की पढ़ाई के स्तर और शिक्षकों की उपस्थिति पर निगरानी रखना।
शिक्षा मंत्रालय की इस पहल का उद्देश्य स्कूलों को 'कम्युनिटी हब' बनाना है, ताकि हर बच्चा बेहतर सुविधाओं के साथ आगे बढ़ सके। जानकारों का मानना है कि जब माता-पिता स्कूल के बजट और विकास में भागीदार बनेंगे, तभी असली जमीनी बदलाव देखने को मिलेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.