All India tv news। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ के दरबार में आस्था और वैभव का ऐसा संगम देखने को मिला है कि दुनिया दंग है। मंदिर का दानपात्र क्या खुला, मानो नोटों की बारिश शुरू हो गई। आलम यह है कि 4 दिनों से लगातार गिनती जारी है, मशीनें हांफ रही हैं, लेकिन 'सांवरिया सरकार' का खजाना कम होने का नाम नहीं ले रहा।
चित्तौड़गढ़ के मंडफिया स्थित सांवलिया जी मंदिर में हर महीने की तरह इस बार भी कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर दानपात्र खोला गया। भंडार से निकले नोटों के ढेर को देखकर बैंक कर्मियों और मंदिर प्रशासन के पसीने छूट गए।
गिनती का चौथा दिन:- अब तक की गणना में नकद राशि 19 करोड़ 21 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुकी है।
मशीनें हुईं पस्त:- नोटों की भारी तादाद को गिनने के लिए कई मशीनें लगाई गईं, जो लगातार चलने के कारण गर्म होकर थक गईं। बैंक के दर्जनों कर्मचारी दिन-रात इस काम में जुटे हैं।
सोना-चांदी और विदेशी मुद्रा:- नकद के अलावा बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और अमेरिका-कनाडा जैसे देशों की विदेशी मुद्राएं भी दानपात्र से निकली हैं, जिनका मूल्यांकन अभी बाकी है।
भक्तों की अटूट आस्था:- कहा जाता है कि सांवलिया सेठ को लोग अपना 'बिजनेस पार्टनर' मानते हैं और मुनाफे का एक हिस्सा उनके दरबार में चढ़ाते हैं। यही वजह है कि यहां हर महीने करोड़ों का चढ़ावा आता है।
सांवलिया जी मंदिर बोर्ड के अनुसार:-
अभी भी कई बोरों में भरे सिक्कों और नोटों की गिनती शेष है। उम्मीद जताई जा रही है कि अंतिम आंकड़ा पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच सुरक्षा के कड़े इंतजामों के साये में यह गिनती की जा रही है।
सांवलिया सेठ का यह खजाना न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि राजस्थान के सबसे अमीर मंदिरों में उनकी गिनती को और पुख्ता करता है।

