All India tv news। उत्तराखंड: देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ी जिले इन दिनों गुलदार (तेंदुए) और भालू के जानलेवा हमलों से थर्रा उठे हैं। पौड़ी, लैंसडाउन और पोखड़ा ब्लॉक के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले एक महीने के भीतर वन्यजीवों के हमलों में कम से कम पांच लोगों की दुखद मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। स्थानीय निवासियों के लिए यह स्थिति एक अघोषित आपदा बन गई है और वन विभाग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रमुख घटनाएँ:-
पौड़ी:- सत्याखाल के पास गजट गांव में मंदिर से लौटते समय 45 वर्षीय नौटियाल जी को गुलदार ने मार डाला।
लैंसडाउन विधानसभा:- सेरोंबगड़ क्षेत्र में एक बाघ/गुलदार के हमले में एक महिला की मौत हो गई।
पौड़ी शहर के पास देवार:- एक 4 वर्षीय बच्चा बाल-बाल बचा, जिस पर गुलदार ने हमला किया था।
चौबट्टाखाल विधानसभा:- 15 नवंबर को जिवाई गांव में एक भालू ने लक्ष्मी देवी नामक महिला पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। महिला दिल्ली AIIMS में भर्ती है और उसकी हालत नाजुक है।
पोखड़ा ब्लॉक (संगलाकोटी-घंडियाल क्षेत्र):- यहां स्थिति सबसे भयावह रही, जहां लगातार दो दिनों के भीतर गुलदार के हमले में दो महिलाओं की मौत हो गई।
पोखड़ा ब्लॉक (बगड़ीगाड़ गांव) :- रानी देवी (पत्नी रमेश बंडूनी) को गुलदार ने मार डाला, इस क्षेत्र में दो महीने में यह दूसरी मौत थी।
हमलों के मुख्य कारण और स्थानीय निवासियों के आरोप:
इन जानलेवा हमलों के पीछे दो मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:-
पलायन और झाड़ियाँ :- पलायन के कारण कई गांव खाली हो गए हैं। न तो जंगल से घास कट रही है और न ही लकड़ियां लाई जा रही हैं, जिससे घरों के पास तक बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच का अंतर खत्म हो गया है, जिससे वन्यजीव आसानी से घरों के पास तक पहुंच रहे हैं।
बूढ़े और असहाय जानवर :- स्थानीय लोगों का डर है कि वन विभाग द्वारा दूसरे शहरों या राज्यों से लाए गए कुछ बूढ़े और पिंजरों में बंद गुलदारों को जानबूझकर इन जंगलों में छोड़ा जा रहा है। ये बूढ़े जानवर, जो शिकार करने में असमर्थ हैं, आसान शिकार के रूप में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को निशाना बना रहे हैं।
वन विभाग की निष्क्रियता:-
स्थानीय लोगों में वन विभाग के प्रति भारी गुस्सा है। आरोप है कि विभाग किसी भी नरभक्षी गुलदार को पकड़ने या मारने में पूरी तरह से असमर्थ साबित हो रहा है। लगातार हो रहे हमलों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों को डर है कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो न जाने और कितनी जानें जाएंगी।
वन विभाग ने इन क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है और पिंजरे लगाने का दावा किया है, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है ताकि इंसानी जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

