राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को नई उड़ान: पर्वतारोहियों के लिए खुली 83 चोटियों की राह।

 


All India tv news। देवभूमि उत्तराखंड से साहसिक खेलों और पर्वतारोहण प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के साझा प्रयासों से अब उत्तराखंड की 83 ऊंची चोटियों को पर्वतारोहण के लिए आधिकारिक तौर पर खोल दिया गया है। इनमें दुनिया की कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण और प्रतिष्ठित चोटियां शामिल हैं।

उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। अब पर्वतारोही 5700 मीटर से लेकर 7756 मीटर तक की ऊंचाई वाली 83 चोटियों पर फतह हासिल कर सकेंगे।

इन प्रमुख चोटियों पर रहेगी दुनिया की नजर:-

इस सूची में हिमालय की वे चोटियां शामिल हैं, जिनका नाम सुनकर ही पर्वतारोहियों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं:

कामेट (7756 मीटर): इस अभियान की सबसे ऊंची और चुनौतीपूर्ण चोटी।

नंदा देवी पूर्व:- सामरिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण।

चौखंबा समूह:- अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध।

त्रिशूल समूह:- साहसी पर्वतारोहियों की पहली पसंद।

शिवलिंग:- जिसे 'हिमालय का आल्प्स' भी कहा जाता है।

पंचचूली और नीलकंठ: कुमाऊं और गढ़वाल की शान।

इस फैसले के बड़े मायने:-

स्थानीय रोजगार:- पर्वतारोहण गतिविधियों के बढ़ने से पोर्टर्स, गाइड्स और होमस्टे संचालकों की आय में भारी वृद्धि होगी।

साहसिक पर्यटन का हब:- उत्तराखंड अब वैश्विक मानचित्र पर 'माउंटेनियरिंग हब' के रूप में और अधिक मजबूती से उभरेगा।

नियमों में सरलता:- इन चोटियों के खुलने से अब अनुमति प्रक्रिया को भी सुव्यवस्थित किया जा रहा है, जिससे विदेशी और भारतीय पर्वतारोहियों को आसानी होगी।

विशेष नोट: हालांकि चोटियों को खोल दिया गया है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण की सुरक्षा और 'जीरो वेस्ट' (Zero Waste) नीति का पालन करना अनिवार्य होगा।