All India tv news। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के हजारों मदरसा छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के साथ ही प्रदेश के 452 मदरसों में अब उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। इस फैसले से मदरसा छात्र अब न केवल मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ेंगे, बल्कि उनकी डिग्रियां सरकारी नौकरियों के लिए भी पूरी तरह मान्य होंगी।
डिग्रियों की अमान्यता का संकट होगा खत्म :-
अब तक उत्तराखंड के मदरसों से शिक्षा प्राप्त कर रहे हजारों छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर थी। आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 43,186 छात्र मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल जैसे कोर्स कर चुके हैं। लेकिन, मुंशी-मौलवी और आलिम की डिग्रियों को उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं के समकक्ष मान्यता नहीं प्राप्त थी। इसके चलते प्रतिभावान छात्र शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद सरकारी नौकरियों की दौड़ से बाहर हो जाते थे।
मुख्यधारा से जुड़ेंगे 452 मदरसे :-
प्राधिकरण के इस फैसले के बाद अब इन 452 मदरसों में पढ़ने वाले छात्र सीधे उत्तराखंड बोर्ड के दायरे में आएंगे।
क्या बदलेगा?
अब छात्रों को अरबी-फारसी के साथ-साथ आधुनिक विषयों (गणित, विज्ञान, अंग्रेजी) की शिक्षा भी बोर्ड के मानकों के अनुसार दी जाएगी।
सबसे बड़ा फायदा:- हर साल मदरसों से निकलने वाले हजारों छात्र-छात्राओं के शैक्षिक प्रमाणपत्र अब फर्जी या अमान्य नहीं कहलाएंगे, बल्कि वे प्रदेश और देश की किसी भी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकेंगे।
भविष्य के साथ खिलवाड़ पर रोक :-
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के इस कदम को मदरसों के 'आधुनिकीकरण' और 'सशक्तीकरण' के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल साक्षरता दर में सुधार होगा, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

