All India tv news। उत्तराखंड की राजनीति और कर्मचारी जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर अपनी 'धमक' दिखाते हुए राज्य के हजारों उपनल कर्मियों की वर्षों पुरानी मुराद पूरी कर दी है। लंबे समय से आंदोलनरत उपनल कर्मचारियों के लिए धामी सरकार ने 'समान कार्य, समान वेतन' का शासनादेश जारी कर दिया है।"
मुख्य समाचार :-
1. वर्षों का इंतजार हुआ खत्म:-
उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत उपनल कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पिछले कई सालों से सड़कों पर थे। कई सरकारें आईं और गईं, आश्वासन मिले, लेकिन समाधान नहीं निकला। आखिरकार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस जटिल विषय पर ठोस निर्णय लेते हुए ऐतिहासिक शासनादेश जारी कर दिया है।
2. किसे मिलेगा लाभ?
जारी किए गए शासनादेश के अनुसार, जिन उपनल कर्मियों ने अपनी सेवा के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं, वे अब 'समान कार्य के बदले समान वेतन' के हकदार होंगे। इस फैसले से राज्य के हजारों परिवारों के भविष्य में स्थिरता और सुरक्षा आएगी।
3. फैसलों की पिच पर सीएम धामी का 'सिक्सर' :-
यह उपलब्धि मुख्यमंत्री धामी के खाते में दर्ज एक और बड़ा मील का पत्थर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम धामी ने पेचीदा मामलों को सुलझाने की अपनी छवि को और मजबूत किया है। इससे पहले वे:
समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने।
देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाने।
धर्मांतरण विरोधी कानून और कठोर भू-कानून की दिशा में कदम उठाकर अपनी निर्णायक क्षमता साबित कर चुके हैं।
प्रमुख बिंदु :-
ऐतिहासिक फैसला:- 10 साल की सेवा वाले उपनल कर्मियों को मिलेगा समान वेतन।
बढ़ी कार्यक्षमता:- इस निर्णय से विभागों के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद।
सुरक्षित भविष्य:- हजारों कर्मचारियों के आर्थिक सशक्तिकरण की राह खुली।
धामी सरकार की साख:- लंबित मांगों को पूरा करने वाली सरकार के रूप में उभरी।
मुख्यमंत्री के इस कदम से न केवल उपनल कर्मचारियों में खुशी की लहर है, बल्कि इसे राज्य की कार्य दक्षता सुधारने की दिशा में भी एक बड़ा निवेश माना जा रहा है। सीएम धामी ने एक बार फिर साबित किया है कि वे 'विकल्प रहित संकल्प' के मंत्र पर अडिग हैं।


