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पर्वतीय जिलों के वाहनों को 6 महीने की राहत… लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं!


 

All India tv news। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों विशेषकर अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के वाहन स्वामियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से चल रहे विरोध और भौगोलिक परिस्थितियों के दबाव के बीच, धामी सरकार ने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के माध्यम से फिटनेस जांच की अनिवार्यता पर 6 महीने की मोहलत दे दी है।
 मुख्य बिंदु :-
  • अस्थायी राहत: अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के कमर्शियल वाहनों को अगले 6 महीनों तक पुराने मैन्युअल तरीके से ही आरटीओ (RTO) में फिटनेस कराने की छूट मिलेगी।
  • बागेश्वर को अधिक समय: पड़ोसी जिले बागेश्वर के वाहन स्वामियों को इस प्रक्रिया से एक साल की राहत दी गई है।
  • एटीएस का पेच: केंद्र सरकार के नियमों के तहत, पुरानी गाड़ियों की फिटनेस अब मशीनीकृत केंद्रों (ATS) पर ही होनी है, लेकिन पहाड़ में इन केंद्रों की कमी और दूरी ने वाहन स्वामियों की कमर तोड़ दी थी। 
सरकार ने राहत तो दे दी है, लेकिन सवाल अभी भी वही हैं।
  1. दूरी का संकट: अल्मोड़ा के वाहनों को फिटनेस के लिए हल्द्वानी या दूरदराज के मैदानों में जाना पड़ता है। क्या 6 महीने में पहाड़ के भीतर एटीएस केंद्र स्थापित हो पाएंगे?
  2. आर्थिक बोझ: पुराने कमर्शियल वाहनों पर लगने वाले भारी-भरकम फिटनेस शुल्क को लेकर भी जनता में आक्रोश है। हालाँकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में फिटनेस शुल्क में प्रस्तावित वृद्धि को 1 जुलाई 2026 तक टाल दिया है।
  3. रोजी-रोटी पर संकट: टैक्सी और ट्रक ऑपरेटर्स का कहना है कि अगर हर फिटनेस के लिए उन्हें दो-तीन दिन का समय और हजारों रुपये डीजल में फूंकने पड़ेंगे, तो पहाड़ में परिवहन व्यवस्था ठप हो जाएगी।

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