All India tv news। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गहरे संकट में है। जिला अस्पताल में तैनात दो मात्र फिजिशियन (विशेषज्ञ डॉक्टर) 1 अप्रैल से अपनी सेवाएं बंद करने जा रहे हैं, जिसके बाद पूरा जिला विशेषज्ञ विहीन हो जाएगा।
मुख्य संकट और प्रभाव :-
विशेषज्ञों का पलायन:- अस्पताल में तैनात दोनों फिजिशियन के जाने से जिले की मुख्य स्वास्थ्य सेवाओं पर ताला लग सकता है।
रेफरल सेंटर बनेगा अस्पताल:- विशेषज्ञ न होने के कारण अब गंभीर मरीजों को मामूली इलाज के लिए भी अल्मोड़ा या हल्द्वानी जैसे शहरों का रुख करना पड़ेगा।
इमरजेंसी पर दबाव:- फिजिशियन की अनुपस्थिति में हृदय रोग, गंभीर बुखार और अन्य आंतरिक बीमारियों के मरीजों के लिए आपातकालीन सेवाएं भी ठप हो सकती हैं।
क्यों गहराया संकट?
यह स्थिति पहली बार नहीं बनी है। इससे पहले भी प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के बैनर तले डॉक्टर अपनी मांगों, जैसे कि पदोन्नति और वेतन विसंगतियों को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। हाल के महीनों में कई डॉक्टरों पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई और स्थानांतरण नीतियों के खिलाफ भी चिकित्सकों में भारी रोष देखा गया है।
ग्रामीणों और मरीजों की बढ़ी मुश्किलें :-
पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए जिला अस्पताल ही एकमात्र सहारा था। विशेषज्ञों की कमी का सीधा असर उन हजारों लोगों पर पड़ेगा जो दूर-दराज के गांवों से इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं।
प्रशासन की चुप्पी:- अब तक प्रशासन की ओर से इस संकट से निपटने के लिए किसी वैकल्पिक व्यवस्था या नई नियुक्तियों की ठोस योजना सामने नहीं आई है, जिससे जनता में आक्रोश बढ़ रहा है।
क्या सरकार 1 अप्रैल से पहले कोई ठोस कदम उठाएगी या बागेश्वर के लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाएगा? देखते रहें [आपके न्यूज़ चैनल का नाम]।

