expr:class='data:blog.pageType' id='mainContent'>

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

सल्ट के मौलेखाल में बिखरे कुमाऊँनी होली के रंग; महिला मंडलियों के झोड़े ने बांधा समां।

 


All India tv news। उत्तराखंड की देवभूमि इस समय रंगों और संगीत के उत्सव में सराबोर है। अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र के मौलेखाल में होली का उल्लास अपने चरम पर है। यहाँ पारंपरिक कुमाऊँनी होली की वह झलक देखने को मिल रही है, जो आज भी अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है। विशेष रूप से महिला मंडलियों द्वारा प्रस्तुत किए गए झोड़े और लोक नृत्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। देखिए हमारी यह विशेष रिपोर्ट। 

सल्ट के मुख्य बाजार मौलेखाल में इन दिनों फागुन की मस्ती छाई हुई है। पहाड़ की वादियों में ढोल-दमाऊ और मंजीरों की थाप के साथ होली का गायन गूंज रहा है। यहाँ होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि लोक संस्कृति का एक जीवंत पर्व है।

इस बार मौलेखाल में महिला होली का अद्भुत नजारा देखने को मिला। क्षेत्र की विभिन्न महिला मंडलियों ने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर होली का आगाज किया। महिलाओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की और फिर गोल घेरा बनाकर कुमाऊँ के प्रसिद्ध 'झोड़ा' नृत्य की प्रस्तुति दी।

रिपोर्ट की मुख्य बातें:

पारंपरिक झोड़ा और चांचरी: महिलाओं ने झोड़े के माध्यम से पहाड़ के जनजीवन और ऋतु परिवर्तन के गीतों को स्वर दिया।

बैठकी और खड़ी होली: मौलेखाल के सार्वजनिक स्थलों पर होल्यारों द्वारा शास्त्रीय रागों पर आधारित बैठकी होली और जोशीली खड़ी होली का आयोजन किया जा रहा है।

सांस्कृतिक धरोहर: स्थानीय लोगों का कहना है कि मौलेखाल की होली पुरानी परंपराओं को सहेजने का एक माध्यम है, जहाँ नई पीढ़ी भी उत्साह से भाग ले रही है।

सामूहिक भोज: होली के इस अवसर पर पारंपरिक व्यंजनों जैसे आलू के गुटके, गुजिया और सिंगाल का आनंद भी लिया जा रहा है। 

"मौलेखाल की होली आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। यहाँ की महिला होली की अपनी एक अलग पहचान है, जिसमें मर्यादा और लोक कला का सुंदर संगम दिखता है।"

पहाड़ों से आई ये तस्वीरें बताती हैं कि आधुनिकता के दौर में भी हमारी लोक संस्कृति कितनी समृद्ध है। मौलेखाल में होली का यह सिलसिला टीका होली तक जारी रहेगा।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.