All India tv news। पटना जंक्शन पर आज जीआरपी (राजकीय रेल पुलिस) ने वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में दिल्ली-मालदा टाउन फरक्का एक्सप्रेस से 100 से अधिक जीवित कछुए बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत पांच तस्करों को हिरासत में लिया है।
घटना आज तड़के करीब 4 बजे की है, जब ट्रेन संख्या 13484 फरक्का एक्सप्रेस पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर पहुंची। पहले से सतर्क जीआरपी की टीम ने ट्रेन में छापेमारी की और पांच संदिग्ध बोरियों को जब्त किया। जब इन बोरियों को खोला गया, तो पुलिसकर्मी भी दंग रह गए।
इन बोरियों में 100 से ज्यादा जिंदा कछुए ठूंस-ठूंस कर भरे गए थे। तस्करों की क्रूरता का आलम यह था कि कछुओं के पैर रस्सियों से बंधे थे और उनके मुंह पर क्लिप लगा दी गई थी ताकि वे कोई आवाज न कर सकें। इस अमानवीय व्यवहार के कारण दम घुटने से एक कछुए की मौत भी हो गई है।
तस्करी का रूट और उद्देश्य :-
प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि इन कछुओं को वाराणसी (उत्तर प्रदेश) से लोड किया गया था और इन्हें कोलकाता (पश्चिम बंगाल) ले जाया जा रहा था। पकड़े गए तस्करों में एक महिला भी शामिल है। पुलिस अब इन आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इस अंतरराज्यीय गिरोह के मुख्य सरगना तक पहुंचा जा सके।
बाजार मूल्य और कानून :-
बरामद कछुए इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल जैसी दुर्लभ प्रजाति के बताए जा रहे हैं, जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत लाखों से करोड़ों रुपये तक आंकी जाती है। इन कछुओं का इस्तेमाल अक्सर मांस, अंधविश्वास से जुड़ी दवाओं या अवैध पालतू व्यापार के लिए किया जाता है।
फिलहाल, जीआरपी ने वन विभाग को सूचित कर दिया है और कछुओं को उन्हें सौंपने की प्रक्रिया जारी है। रेलवे पुलिस की इस मुस्तैदी ने एक बड़े वन्यजीव अपराध को रोक दिया है।

