All India tv news। खेल के मैदान से भारत के लिए एक बेहद गौरवशाली और भावुक कर देने वाली खबर सामने आ रही है। ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के 21 वर्षीय युवा वेटलिफ्टर वल्लुरी अजय बाबू ने पुरुषों की 79 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर तिरंगा लहरा दिया है। अजय बाबू ने कुल 330 किलोग्राम का भारी-भरकम वजन उठाकर इस सफलता को चूमा। लेकिन दर्शकों, यह जीत सिर्फ एक पदक की नहीं है, यह कहानी है एक बेटे की, जिसने अपने पिता की अधूरी आस और विरासत को एक कदम आगे बढ़ाया है।
दरअसल, इस कहानी के तार जुड़े हैं साल 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स से। ठीक 16 साल पहले, अजय बाबू के पिता वल्लुरी श्रीनिवास राव ने भारत के लिए वेटलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। तब महज 5 साल के अजय ने अपने पिता को स्टार बनते देखा और वहीं से उनके मन में देश के लिए मेडल जीतने की ललक जागी। आज 16 साल बाद, बेटे ने उसी मंच पर न सिर्फ इतिहास दोहराया, बल्कि पदक का रंग बदलकर उसे सिल्वर कर दिया।
मुकाबला बेहद कड़ा था। ग्लासगो के मंच पर अजय बाबू ने अपनी ताकत का ऐसा लोहा मनवाया कि स्नैच राउंड में 149 किग्रा वजन उठाकर उन्होंने एक नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड (CWG Record) भी अपने नाम कर लिया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में 181 किग्रा उठाकर उन्होंने कुल 330 किग्रा के साथ चांदी पर अपना कब्जा जमाया। आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के एक छोटे से गांव से निकले अजय बाबू ने साबित कर दिया कि जब मेहनत, जुनून और पारिवारिक विरासत एक साथ मिलते हैं, तो पीढ़ियां सिर्फ इतिहास दोहराती नहीं हैं, बल्कि उसे और ऊंचा उठा देती हैं।
इस ऐतिहासिक जीत के बाद अजय बाबू भावुक नजर आए और उन्होंने अपनी इस कामयाबी को अपने पिता और देश के नाम समर्पित किया है। पूरा देश आज वल्लुरी परिवार की इस असाधारण उपलब्धि पर गर्व कर रहा है।


