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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारतीय रनर गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक कमाल, 10 हजार मीटर दौड़ में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने।


All India tv news। "ग्लासगो से भारत के लिए एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आ रही है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय धावक गुलवीर सिंह ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज करा लिया है। पुरुषों की बेहद कठिन मानी जाने वाली 10,000 मीटर लंबी दूरी की दौड़ में गुलवीर सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए
सिल्वर मेडल (रजत पदक) अपने नाम किया है।"

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार "ग्लासगो के स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में हो रही इस रेस के दौरान मौसम काफी चुनौतीपूर्ण था। लगातार हो रही भारी बारिश और भीगे हुए ट्रैक के बावजूद 28 वर्षीय गुलवीर सिंह ने अपनी अदम्य सहनशक्ति और बेहतरीन रणनीति का परिचय दिया। शुरुआती 5,000 मीटर तक वे फ्रंट पैक में बने रहे और अंत में एक बेहद ही तूफानी स्प्रिंट (आखरी लैप) लगाकर उन्होंने तीसरा स्थान छोड़कर सीधे सिल्वर मेडल पर कब्जा कर लिया।
गुलवीर ने यह दूरी 27 मिनट 49.78 सेकंड में पूरी की। इस रेस का गोल्ड मेडल ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन (27:48.93) ने जीता, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुलार्की को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा।"
क्यों खास है यह मेडल? :-
"यह मेडल भारत के लिए किसी गोल्ड से कम नहीं है, क्योंकि लंबी दूरी की इस रेस पर हमेशा से कीनिया, युगांडा और इथियोपिया जैसे अफ्रीकी देशों का एकछत्र राज रहा है। लेकिन इस बार गुलवीर ने अफ्रीकी धावकों को पोडियम की रेस से बाहर कर पूरी दुनिया को चौंका दिया। राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) के इतिहास में आज तक कोई भी भारतीय पुरुष एथलीट 10 हजार मीटर की स्पर्धा में पोडियम तक नहीं पहुंच सका था।"
पारिवारिक और सैन्य पृष्ठभूमि :-
"उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गांव के रहने वाले गुलवीर सिंह एक किसान परिवार से आते हैं और भारतीय सेना के द ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में नाइब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे 2025 की एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में डबल गोल्ड (5,000 मीटर और 10,000 मीटर) जीतकर एशिया के बेस्ट रनर बन चुके हैं। गुलवीर की इस ऐतिहासिक जीत के बाद देश के राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत खेल जगत की तमाम बड़ी हस्तियों ने उन्हें बधाई दी है।"
"गुलवीर सिंह का यह सिल्वर मेडल न सिर्फ देश का गौरव बढ़ा रहा है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स में लंबी दूरी की दौड़ के लिए एक नए युग की शुरुआत भी है।"

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