All India tv news। महाराष्ट्र के पुणे (पिंपरी-चिंचवड़) के मोशी से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। यहाँ के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में भारी बारिश के बाद अचानक कचरे का एक विशाल पहाड़ भरभराकर प्रशासनिक इमारत पर गिर गया। पिछले 83 घंटों से चल रहा मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन अब खत्म हो चुका है, लेकिन इस हादसे ने 9 मासूम मजदूरों की जिंदगी छीन ली है। मलबे से आखिरी लापता कर्मचारी, वामन कसबे का शव भी बरामद कर लिया गया है। इस भीषण त्रासदी के बीच, मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकले कर्मचारी विजय सपकाळ की आपबीती ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जिन्होंने मलबे के नीचे 9 घंटे गुजारते हुए अपनी पत्नी को 'आखिरी सेल्फी' भेजी।
कैसे काल बन गया कचरे का पहाड़?
यह दर्दनाक हादसा 8 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ था। इलाके में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण डंपिंग ग्राउंड में सालों से जमा बिना प्रोसेस किया हुआ कचरा और औद्योगिक वेस्ट अचानक अस्थिर हो गया। देखते ही देखते हजारों टन कचरे का यह पहाड़ एंटनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड कंपनी की तीन मंजिला प्रशासनिक इमारत पर गिर गया, जिससे पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। हादसे के वक्त इमारत के अंदर कुल 23 कर्मचारी मौजूद थे.
विजय की आपबीती: '9 घंटे... मीथेन गैस का दमघोंटू साया और वो आखिरी सेल्फी' :-
इस खौफनाक मंजर के बीच मौत को मात देकर लौटे कर्मचारी विजय सपकाळ की कहानी आँखों में आँसू ला देने वाली है। मलबे के नीचे दबे विजय के पैर पर एक भारी खंभा गिर गया था, चारों तरफ कांच के टुकड़े बिखरे थे और लैंडफिल साइट से निकलने वाली जहरीली मीथेन गैस के कारण उनका सांस लेना दूभर हो रहा था।
जब विजय को लगा कि अब उनका बचना नामुमकिन है, तो उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने मलबे के अंधेरे से ही अपनी पत्नी को एक 'आखिरी सेल्फी' व्हाट्सएप की और मैसेज में लिखा— "मैं बिल्डिंग के नीचे दबा हूँ... जल्दी आओ..."। करीब 9 घंटे तक मौत के बेहद करीब रहने के बावजूद, विजय खुद तो हौसला बनाए ही रहे, साथ ही मलबे में फंसे अपने अन्य साथियों को भी लगातार आवाजें देकर उनका हौसला बढ़ाते रहे, जिसके बाद आखिरकार बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
लापरवाही पर उठे सवाल, एंटनी कंपनी पर FIR की तैयारी :-
इस भीषण हादसे के बाद अब प्रशासन और कंपनी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिस इमारत को सिर्फ ग्राउंड फ्लोर बनाने की मंजूरी मिली थी, वह दो से तीन मंजिला कैसे बन गई? प्रशासन अब एंटनी कंपनी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। हालाँकि, कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस घटना को भारी बारिश के कारण हुई एक प्राकृतिक आपदा यानी 'एक्ट ऑफ गॉड' करार दिया है।
मुआवजे और मदद का ऐलान :-
हादसे के बाद एंटनी वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी ने प्रभावित परिवारों के लिए निम्नलिखित घोषणाएं की हैं:
- मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता।
- प्रत्येक मृतक के परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी।
- आश्रित नाबालिग बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाना।
- घायलों के इलाज और काउंसलिंग का पूरा खर्च कंपनी वहन करेगी।
कचरे के इस पहाड़ ने 9 हंसते-खेलते परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है। विजय सपकाळ जैसी जांबाजी की कहानियां जहाँ हमें उम्मीद देती हैं, वहीं प्रशासनिक लापरवाही के कारण उजड़े ये घर जवाब मांग रहे हैं कि आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है?

