इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से आ रही है। देहरादून के प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी में टोंस नदी पर बना करोड़ों का नया पुल पहली ही भारी बारिश में जवाब दे गया है। जी हां, जिस पुल को बनाने में जनता की गाढ़ी कमाई के 16 करोड़ रुपये फूंक दिए गए, वो पुल जनता को समर्पित होने के महज 16 दिन के भीतर ही धंस गया है।"
आपको बता दें कि पिछले साल सितंबर में आई आपदा के बाद स्थानीय लोगों ने पूरे 300 दिन तक इस पुल के बनने का इंतजार किया था। बीती 12 जुलाई को ही इस नए पुल को आनंद-फानन में खोला गया था, लेकिन पहली ही मूसलाधार बारिश ने एप्रोच रोड को मटियामेट कर दिया और पुल के मुख्य हिस्से में बड़ा धंसाव आ गया है। इस वक्त इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह से प्रभावित है और विकासनगर, चकराता व हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाले हजारों लोग रास्ते में फंसे हैं।
स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों का कहना है कि जब 11 जुलाई की रात को यहां बनाई गई अस्थाई पुलिया बही थी, तब विभाग ने अपनी साख बचाने के लिए आनन-फानन में 12 जुलाई से इस मुख्य पुल को शुरू तो कर दिया, लेकिन इसके एप्रोच रोड की मजबूती पर कोई ध्यान नहीं दिया। मात्र 16 दिनों के भीतर इस ₹16 करोड़ के प्रोजेक्ट की यह हालत होना सीधे तौर पर इंजीनियरिंग और मॉनिटरिंग पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से दोनों तरफ से बैरिकेडिंग कर भारी वाहनों और आम यातायात को रोक दिया है। रूट को डायवर्ट किया गया है, लेकिन संकरी वैकल्पिक सड़कों की वजह से प्रेमनगर और आसपास के इलाकों में मीलों लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है। यूनिवर्सिटी जाने वाले छात्र, दफ्तर जाने वाले लोग और मरीज एम्बुलेंस में फंसे हुए हैं। अधिकारी जांच की बात कह रहे हैं, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है कि इस भारी लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?

