All India tv news। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत अगर आपने भी अपना एन्यूमरेशन फॉर्म यानी गणना फॉर्म भरकर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को सौंप दिया था, तो आज की यह ख़बर आपके लिए सबसे ज़रूरी है। क्या आपका फॉर्म इलेक्शन कमीशन के रिकॉर्ड में ऑनलाइन चढ़ चुका है या फिर आपका फॉर्म कहीं अटका हुआ है? कई बार टेक्निकल गड़बड़ी या बीएलओ की लापरवाही से आपका नाम कटने का ख़तरा भी हो सकता है। लेकिन घबराइए नहीं! अब आपको किसी सरकारी दफ़्तर जाने की ज़रूरत नहीं है। आप अपने मोबाइल फोन से मात्र 2 मिनट में इसका स्टेटस चेक कर सकते हैं।
आइए आपको बताते हैं इसका सबसे आसान और स्टेप-बाय-स्टेप तरीक़ा क्या है।
- स्टेप 1: सबसे पहले अपने फोन के ब्राउज़र में इलेक्शन कमीशन का ऑफिशियल वोटर पोर्टल voters.eci.gov.in ओपन करें।
- स्टेप 2: होम पेज खुलते ही आपको सबसे ऊपर 'Fill Enumeration Form' का एक विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।
- स्टेप 3: अब अगर आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं, तो 'Sign Up' करके मोबाइल नंबर और ओटीपी के ज़रिए रजिस्ट्रेशन कर लें। अगर पहले से अकाउंट है, तो सीधे अपने नंबर और पासवर्ड से 'Login' करें।
- स्टेप 4: लॉगिन होने के बाद दोबारा डैशबोर्ड पर दिख रहे 'Fill Enumeration Form' पर क्लिक करें।
- स्टेप 5: अब आपके सामने एक बॉक्स खुलेगा। यहाँ अपना राज्य (State) चुनें और अपना EPIC नंबर यानी वोटर आईडी कार्ड का नंबर डालकर 'Search' बटन पर क्लिक कर दें।
अब ध्यान से समझिए कि सर्च करने के बाद आपकी स्क्रीन पर क्या दिखेगा!
- अगर फॉर्म जमा हो गया है: स्क्रीन पर साफ़ तौर पर एक मैसेज आएगा— "Your form has already been submitted with mobile number XXXXX..."। इसका मतलब है कि बीएलओ ने आपका फॉर्म सफलतापूर्वक पोर्टल पर अपलोड कर दिया है और आपका नाम सुरक्षित है।
- अगर फॉर्म जमा नहीं हुआ है: सर्च करते ही कोई मैसेज आने की जगह सीधे एक नया या खाली एन्यूमरेशन फॉर्म खुलकर सामने आ जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि आपका डेटा अभी तक ऑनलाइन नहीं चढ़ाया गया है।
ध्यान दें! अगर स्क्रीन पर खाली फॉर्म खुले, या फिर कोई ऐसा मोबाइल नंबर दिखे जो आपका नहीं है, तो बिना समय गंवाए तुरंत अपने इलाक़े के BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) से संपर्क करें और अपनी जानकारी को तुरंत दुरुस्त करवाएं। चुनाव आयोग के इस अभियान का मक़सद वोटर लिस्ट को पूरी तरह साफ़ और सही बनाना है, ताकि कोई भी असली वोटर वोट देने से न छूटे।

