All India tv news। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक सराहनीय पहल की खबर आ रही हैं। जिला पंचायत अल्मोड़ा में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत गांव-गांव में स्वच्छता का संदेश देना शुरू कर दिया है।
जिला पंचायत द्वारा चलाए गए इस अभियान के अंतर्गत विधानसभा सल्ट के मौलेखाल बाजार में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर स्वच्छता का संदेश दिया। इस नुक्कड़ नाटक का मुख्य संदेश - आओ मिलकर अपनाएं आदत नई, स्वच्छ गांव की ओर बढ़ाएं कदम नए।
अभियान में अंतर्गत नुक्कड़ नाटक में कूड़े को अलग-अलग करने का तरीका बहुत आसान भाषा में समझाया गया है:
1. हरा डस्टबिन - गीला कूड़ा: रसोई का कचरा, फल-सब्जियों के छिलके।
2. नीला डस्टबिन - सूखा कूड़ा: कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच।
3. लाल डस्टबिन - बायोमेडिकल वेस्ट: मेडिकल से जुड़ा कचरा।
4. काला डस्टबिन - ई-वेस्ट: खराब मोबाइल, चार्जर, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान।
जिला पंचायत का कहना है - कचरा प्रबंधन, स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन। पेड़ लगाएं, प्रदूषण घटाएं, धरती को हरा-भरा बनाएं।
यह पहल*विश्व पर्यावरण दिवस 2026की थीम "प्लास्टिक मुक्त धरती, हरित भविष्य की गारंटी" के तहत की गई है। इसका मकसद गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाना है।
अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत अल्मोड़ा की ओर से अपील की गई है और किसी भी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 9530094913 भी जारी किया गया है।
अल्मोड़ा जिला पंचायत की ये पहल सच में काबिले तारीफ है। अगर हर गांव में कूड़े को इसी तरह अलग-अलग रखा गया तो पहाड़ की सुंदरता बनी रहेगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।

