All India tv news। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यानी एआई, 21वीं सदी की सबसे निर्णायक तकनीक साबित हो रही है। वैश्विक स्तर पर एआई में महारत हासिल करने और तकनीकी महाशक्ति बनने की दौड़ तेज़ हो गई है। इसी बीच, भारत के लिए एक बड़ी और गर्व की खबर सामने आई है। एक ताज़ा वैश्विक विश्लेषण में, भारत को एआई रेस में दुनिया का तीसरा सबसे मज़बूत दावेदार बताया गया है। लेकिन सवाल यह है कि पहले और दूसरे पायदान पर कौन से देश काबिज़ हैं, और भारत की यह रैंकिंग इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब सिर्फ फिल्मों या रिसर्च लैब्स तक सीमित नहीं है; यह हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और देशों की भू-राजनीतिक शक्ति को परिभाषित कर रहा है।
हाल ही में, वैश्विक प्रौद्योगिकी और रणनीति थिंक टैंक, Tortoise Media की एक रिपोर्ट (Global AI Index) ने दुनिया भर में एआई क्षमताओं का गहन विश्लेषण किया है। इस 'ग्लोबल एआई इंडेक्स' में भारत ने ज़बरदस्त छलांग लगाते हुए तीसरा स्थान हासिल किया है।
यह रैंकिंग कई पैमानों पर तय की गई है, जिसमें निवेश, इनोवेशन (नवाचार) और कार्यान्वयन शामिल हैं।
पहले और दूसरे स्थान पर कौन?
रिपोर्ट के अनुसार, एआई सुपरपावर बनने की इस दौड़ में, पहले दो स्थान पर कोई आश्चर्य नहीं है।
पहला स्थान: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), एआई रिसर्च, फंडिंग और टैलेंट पूल में आज भी दुनिया में सबसे आगे है।
दूसरा स्थान: चीन (China), जिसने पिछले एक दशक में एआई में भारी निवेश किया है और वह अमेरिका को कड़ी टक्कर दे रहा है।
भारत की सफलता के मायने:-
भारत का तीसरे स्थान पर आना उसकी बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, विशाल टैलेंट पूल (खासकर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का) और सरकारी पहलों जैसे 'डिजिटल इंडिया' का परिणाम है। भारत ने एआई को स्वास्थ्य सेवा, कृषि और शासन-प्रशासन में लागू करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
भारत के लिए यह रैंकिंग एक बड़ा प्रोत्साहन है। यह दर्शाता है कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अमेरिका और चीन के साथ अंतर को पाटने के लिए अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है, खासकर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और चिप निर्माण के क्षेत्र में।
यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले वर्षों में यह वैश्विक एआई दौड़ क्या मोड़ लेती है।

