All India tv news। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में सहायक अध्यापक भर्ती में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने राज्य के शिक्षा विभाग और निवास प्रमाणपत्र सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 43 गैर-राज्यीय युवाओं ने कथित तौर पर फर्जी स्थायी निवास प्रमाणपत्रों का उपयोग करके डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर प्राथमिक शिक्षा में सहायक अध्यापक के प्रतिष्ठित पद पर नियुक्ति हासिल कर ली।
खुलासे के अनुसार, ये सभी युवा मूल रूप से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के निवासी थे। उन्होंने धोखाधड़ी से उत्तराखंड के निवासी के रूप में खुद को दर्शाने वाले दस्तावेज़ बनवाए, जिससे वे राज्य के भीतर डीएलएड प्रशिक्षण के लिए आवेदन करने के योग्य हो गए।
वर्ष 2024 में जब प्राथमिक शिक्षा में सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई, तो इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन 43 उम्मीदवारों ने न केवल आवेदन किया, बल्कि नौकरी भी हासिल कर ली।
मामले की गंभीरता सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन सभी 43 चयनित उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर दिया है और विस्तृत जांच शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी ताकि भर्ती में पारदर्शिता बनी रहे और वास्तविक योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिल सके।
इस घटना ने राज्य सरकार को निवास प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन के लिए अधिक कठोर नियम और एक मजबूत जांच प्रणाली लागू करने की मांग को हवा दे दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके और राज्य के संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

