All India tv news। स्वास्थ्य सेवाएं जब सेवा न रहकर केवल 'सौदा' बन जाएं, तो समाज के लिए इससे बड़ी चिंता की बात और कुछ नहीं हो सकती। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित चंदन हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। अस्पताल पर अवैध वसूली, मनमाना बिल और मरीजों के शोषण के संगीन आरोप लगे हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रशासन ने जांच समिति का गठन कर दिया है। आज की इस खास रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर क्या है पूरा मामला और कैसे आम जनता इस जांच में सहयोग कर सकती है।
मुख्य खबरें :
अमानवीयता की हद:- परिजनों का आरोप है कि मृत मरीज को वेंटिलेटर पर रखकर लाखों की वसूली की गई।
शव को बनाया 'बंधक':- बिल का भुगतान न होने पर शव को परिजनों को सौंपने से इनकार करने के मामले सामने आए हैं।
आयुष्मान कार्ड पर 'खेला':- गरीब मरीजों और आयुष्मान/गोल्डन कार्ड धारकों से भी अतिरिक्त वसूली की शिकायतें मिली हैं।
जांच समिति सक्रिय:- प्रशासन ने शिकायतों के आधार पर अस्पताल की कार्यप्रणाली की जांच के लिए कमेटी बनाई है।
हल्द्वानी के चंदन अस्पताल के बाहर पिछले कुछ दिनों से भारी हंगामा और प्रदर्शन देखा जा रहा है। ABVP के छात्र नेताओं और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ताजा मामला एक ऐसे मरीज का है जिसकी मृत्यु पहले ही हो चुकी थी, लेकिन परिजनों का दावा है कि अस्पताल प्रशासन ने उसे वेंटिलेटर पर रखकर उपचार जारी रहने का नाटक किया ताकि भारी-भरकम बिल वसूला जा सके।
इतना ही नहीं, अल्मोड़ा से रेफर होकर आई एक महिला की मौत के बाद, अस्पताल ने 80,000 रुपये के बिल की मांग की और भुगतान न होने तक शव देने से मना कर दिया। इस मामले में नैनीताल पुलिस कप्तान के हस्तक्षेप के बाद ही शव को परिजनों को सौंपा गया।
प्रशासन की अपील – आम लोग करें सहयोग:-
जांच समिति ने अब उन सभी मरीजों और उनके परिजनों से आगे आने की अपील की है जो इस अस्पताल की 'लूट' का शिकार हुए हैं। यदि आपके पास:-
# अवैध वसूली के बिल या रसीदें हैं।
# इलाज में लापरवाही या शोषण के साक्ष्य हैं।
# आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद पैसे मांगे जाने के प्रमाण हैं।
तो आप अपने बयान और दस्तावेज जांच समिति के समक्ष दर्ज करा सकते हैं। आधिकारिक शिकायतों के लिए आप उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
क्या चंदन हॉस्पिटल जैसे निजी अस्पतालों पर लगाम लगेगी? क्या गरीब जनता को न्याय मिलेगा? यह तो जांच के बाद ही साफ होगा। फिलहाल, प्रशासन की इस कार्रवाई ने पीड़ित परिवारों में एक उम्मीद जगाई है।

