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राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

भीमताल में डॉक्टरों का बड़ा ऐलान: विधायक पर अभद्रता के आरोप, कार्य बहिष्कार के साथ कैंपों पर भी लगा ब्रेक!

 


All India tv news। उत्तराखंड के भीमताल विधानसभा क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों और स्थानीय विधायक राम सिंह कैड़ा के बीच विवाद गहरा गया है। भीमताल के खनस्यूं में आयोजित एक स्वास्थ्य शिविर के दौरान हुई कथित अभद्रता के बाद डॉक्टरों ने भारी रोष व्यक्त किया है।




मुख्य बिंदु:-

कार्य बहिष्कार का फैसला:- खनस्यूं स्वास्थ्य शिविर में हुई घटना के विरोध में डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अब से वे क्षेत्र में किसी भी सरकारी या निजी स्वास्थ्य कैंप का हिस्सा नहीं बनेंगे।

विधायक पर गंभीर आरोप:- अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. जगदीप सिंह पटपटिया ने भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा पर अभद्रता करने और फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने के लिए अनुचित दबाव डालने का आरोप लगाया है।

सुरक्षा पर सवाल:- डॉक्टरों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान वे सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अपनी जान का खतरा बताते हुए कुमाऊं मंडल के स्वास्थ्य महानिदेशक को शिकायती पत्र भेजा है।

राजनीतिक मोड़-: इस मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू पीड़ित डॉक्टर के समर्थन में उतर आए हैं और आरोपी विधायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, विधायक राम सिंह कैड़ा ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

जनता पर असर:-

डॉक्टरों के इस कड़े रुख और कैंपों के बहिष्कार से भीमताल के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। विशेष रूप से दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोग, जो इन कैंपों के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह लेते थे, अब मुश्किलों का सामना करेंगे।

"विधायक और डॉक्टरों के बीच की यह तकरार अब स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी पड़ती दिख रही है। क्या प्रशासन इस मामले में बीच-बचाव कर डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगा? 

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