All India tv news। उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था से आज एक ऐसी खबर आई है जो न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि भविष्य की एक नई तस्वीर पेश कर रही है। देवभूमि में अब मदरसों की सूरत बदलने वाली है। देहरादून में राज्य के पहले 'आधुनिक मदरसे' को आधिकारिक मान्यता मिल गई है। अब यहां के बच्चे सिर्फ धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनके हाथों में आधुनिक दुनिया की चाबी यानी 'कंप्यूटर' भी होगा।
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार देहरादून के मुस्लिम कॉलोनी स्थित 'एपीजे अब्दुल कलाम मॉडर्न मदरसा' राज्य का पहला ऐसा संस्थान बन गया है जिसे शिक्षा विभाग ने मान्यता दी है। इस मदरसे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी तरह अंग्रेजी माध्यम में होगी।
वक्फ बोर्ड की इस पहल के तहत बच्चों को सुबह के वक्त NCERT आधारित गणित, विज्ञान और सामाजिक अध्ययन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे, जबकि शाम का वक्त धार्मिक शिक्षा के लिए समर्पित होगा। करीब 50 लाख की लागत से तैयार इस मदरसे में स्मार्ट क्लासरूम और अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब की सुविधा दी गई है।
धामी सरकार के अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USMEA) के गठन के बाद यह एक बड़ा बदलाव है। राज्य के 452 मदरसों को मुख्यधारा से जोड़ने की इस मुहिम का मकसद अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को रोजगारपरक शिक्षा देना है। यह आधुनिक मदरसा आज पूरे देश के लिए एक मिसाल पेश कर रहा है कि कैसे परंपरा और आधुनिकता एक साथ चल सकते हैं।

