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राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

चार धाम यात्रा: अब रील्स नहीं, सिर्फ दर्शन! मंदिर परिसरों में कैमरा-फोन पर लगा सख्त पहरा।



 


All India tv news। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा 2026 को लेकर धामी सरकार और बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने अब तक के सबसे बड़े और कड़े फैसले लिए हैं। अगर आप इस साल बाबा केदार या बद्री विशाल के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।

 यात्रा की तारीखें और पंजीकरण :-

इस साल आस्था का यह महापर्व 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ शुरू होगा। वहीं, बाबा केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। बता दें कि 6 मार्च से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ध्यान रहे, बिना पंजीकरण के यात्रा की अनुमति नहीं मिलेगी। 

कैंपिंग और मोबाइल पर प्रतिबंध :-

इस बार यात्रा को सुगम बनाने के लिए दो बड़े बदलाव किए गए हैं।

पहला बदलाव:- मंदिर परिसरों के आसपास कैंपिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पिछले वर्षों में अनियंत्रित टेंटों की वजह से बढ़ी भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण बदलाव:- अब मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन और कैमरा ले जाना पूरी तरह वर्जित होगा। आप न तो फोटो खींच पाएंगे और न ही रील्स बना सकेंगे। श्रद्धालुओं को अपने फोन मंदिर के बाहर निर्धारित काउंटर पर जमा करने होंगे।

सरकार का तर्क है कि इस कदम से न केवल मंदिरों की धार्मिक पवित्रता बनी रहेगी, बल्कि दर्शन की प्रक्रिया भी तेज होगी। अक्सर देखा गया है कि मोबाइल और फोटोग्राफी के चक्कर में कतारें लंबी हो जाती थीं, जिससे आम श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ता था।

तो अगर आप भी देवभूमि की यात्रा पर निकल रहे हैं, तो नियमों का पालन करें और डिजिटल शोर से दूर रहकर भक्ति में लीन हों।


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