All India tv news। देशभर में दूध की शुद्धता और गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब देश के हर स्वतंत्र दूध उत्पादक और विक्रेता के लिए FSSAI रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु :-
अनिवार्य पंजीकरण:- 11 मार्च, 2026 को जारी एडवाइजरी के अनुसार, उन सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं को लाइसेंस लेना होगा जो किसी डेयरी सहकारी समिति सदस्य नहीं हैं।
किसे मिलेगी छूट? वे पशुपालक या किसान जो अपना सारा दूध केवल पंजीकृत सहकारी समितियों को देते हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से अलग लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
टर्नओवर का नियम:- ₹12 लाख से कम वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे दूध विक्रेताओं और उत्पादकों को बेसिक रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जबकि इससे अधिक टर्नओवर वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य है।
सख्त निगरानी:- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि कोई भी विक्रेता बिना वैध प्रमाण पत्र के काम न करे।
यह कदम क्यों जरूरी था?
लगातार आ रही मिलावट की शिकायतों, जैसे दूध में डिटर्जेंट, यूरिया और फॉर्मेलिन जैसे हानिकारक रसायनों की मौजूदगी को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है। इस नए नियम से न केवल दूध की ट्रेसेबिलिटी बढ़ेगी, बल्कि उपभोक्ता के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई:-
FSSAI ने साफ कर दिया है कि बिना पंजीकरण के दूध का कारोबार करना अब गैरकानूनी माना जाएगा। फूड सेफ्टी ऑफिसर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर मिल्क चिलर्स और भंडारण केंद्रों का निरीक्षण करें और नियमों का पालन न करने वालों पर भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

