All India tv news। उत्तराखंड के शिक्षा जगत से आज की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश सरकार ने राज्य के स्कूली बच्चों के लिए पाठ्यक्रम में एक ऐतिहासिक और नया अध्याय जोड़ दिया है। यह बदलाव न केवल छात्रों के ज्ञान के दायरे को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति और आधुनिक कौशल से भी रूबरू कराएगा।"
मुख्य बिंदु :-
उत्तराखंड सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) से राज्य के सभी स्कूलों में NCERT पाठ्यक्रम को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में कुछ महत्वपूर्ण अध्याय और प्रणालियाँ जोड़ी गई हैं:
धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा:- छात्रों के नैतिक विकास के लिए पाठ्यक्रम में अब श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण के अंशों को शामिल किया गया है। प्रार्थना सभाओं में इन ग्रंथों के श्लोकों का पाठ और बोर्डों पर चुनिंदा श्लोक लिखना अब अनिवार्य होगा।
व्यावसायिक शिक्षा :- बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु 544 नए स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू की जा रही है। इसमें कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ हुनर भी सीख सकें।
समान पाठ्यक्रम नीति:- सरकार ने निजी और सरकारी स्कूलों के बीच के अंतर को खत्म करने के लिए 'एक समान पाठ्यक्रम' लागू किया है। अब किसी भी स्कूल में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपने पर उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
अल्पसंख्यक संस्थानों में बदलाव-: राज्य मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अब सभी मदरसों को भी मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, जहाँ अब विज्ञान, गणित और कंप्यूटर जैसे आधुनिक विषयों का अध्ययन अनिवार्य होगा।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास करना और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हुए आधुनिक चुनौतियों के लिए तैयार करना है। अभिभावकों ने सरकार के इस कदम, विशेषकर महंगी किताबों पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया है।

