All India tv news। इंदौर के चंदन नगर से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने इंसानियत और रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पिता ने अपनी पूरी जिंदगी तीन बेटों को पालने में लगा दी, उसकी मौत के बाद उसे दो गज कफन और बेटों का कंधा तक नसीब नहीं हुआ। दो दिन तक घर में पिता की लाश सड़ती रही, चेहरा चूहों ने कुतर दिया, लेकिन बेटों का दिल नहीं पसीजा। और जब एक बेटा पहुँचा भी, तो पिता के शव को मुखाग्नि देने नहीं, बल्कि मकान पर कब्जा करने।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक घटना इंदौर के नगीन नगर की है। 65 वर्षीय छगनलाल इस जर्जर मकान में बिल्कुल अकेले रहते थे और मजदूरी कर अपना गुजारा करते थे। उनकी मौत का खुलासा तब हुआ जब गली में क्रिकेट खेल रहे बच्चों की गेंद उनके घर में गई। अंदर का मंजर देख बच्चों की चीख निकल गई—छगनलाल का शव सड़ चुका था और दुर्गंध फैल रही थी।
हैरानी की बात यह है कि मृतक के तीन बेटे हैं, लेकिन कोई भी उनके साथ नहीं रहता था। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने जब बेटों को पिता की मौत की सूचना दी, तो उन्होंने आने से साफ इनकार कर दिया। किसी ने काम का बहाना बनाया तो किसी ने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।
रिश्तों के कत्ल की इंतहा तो तब हो गई जब शाम को एक बेटा घर पहुँचा। मोहल्ले वालों को लगा कि शायद खून का रिश्ता जाग गया है, लेकिन उस बेटे की आंखों में पिता के जाने का गम नहीं, बल्कि मकान की लालच थी। उसने आते ही पिता के अंतिम संस्कार की बात करने के बजाय घर पर अपना हक जताना और कब्जा लेना शुरू कर दिया।
इंसानियत को झकझोर देने वाली इस घटना ने साफ कर दिया है कि आज के दौर में कुछ लोगों के लिए संपत्ति की कीमत रिश्तों से कहीं बढ़कर हो गई है। जिस घर को छगनलाल ने बड़े अरमानों से बनाया था, वही घर आज उनकी बेबसी और बेटों की निर्दयता का गवाह बन गया है।

