All India tv news। चौखुटिया (अल्मोड़ा): देवभूमि उत्तराखंड के शांत पहाड़ों से अब एक गंभीर चेतावनी गूंज रही है। मध्य हिमालयी क्षेत्रों में धधकती वनाग्नि, तेजी से सूखते प्राकृतिक जल स्रोत और बिगड़ते जलवायु संतुलन ने विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों की नींद उड़ा दी है। इस पर्यावरणीय संकट को देखते हुए सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने अब आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
आगामी 5 जून 2026 को 'विश्व पर्यावरण दिवस' के अवसर पर अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया स्थित प्रसिद्ध अगनेरी मंदिर परिसर में एक विशाल “हिमालय आपातकाल बैठक” बुलाई गई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना और सरकार पर दबाव बनाना है।
मुख्य बिंदु:-
- बढ़ती वनाग्नि: बेकाबू होती जंगलों की आग जैव विविधता को राख कर रही है।
- जल संकट: पारंपरिक नौले और धारे सूखने से गांवों में पानी का हाहाकार मचा है।
- जलवायु असंतुलन: बेमौसम बारिश और बढ़ता तापमान खेती और जीवन को प्रभावित कर रहा है।
- जनआंदोलन की राह: जागरूक नागरिक अब इसे केवल चर्चा तक सीमित न रखकर एक बड़े आंदोलन का रूप दे रहे हैं।
नारा: “हिमालय बचाओ — भविष्य बचाओ”
अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि आज हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ नहीं बचेगा। यह बैठक केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सत्ता और समाज दोनों को जगाने की एक निर्णायक कोशिश है।


