All India tv news। "कल तक जो बच्चा स्कूल पहुँचने के लिए रोज़ाना 6 किलोमीटर पैदल चलता था, आज उसने दुनिया के सबसे कठिन खेल 'मिक्स मार्शल आर्ट्स' (MMA) में अपनी बादशाहत कायम कर ली है। हम बात कर रहे हैं चमोली के दिगंबर सिंह रावत की, जो MFN लाइटवेट वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद पहली बार अपनी जड़ों की ओर लौटे। अपनी माटी और अपने पुराने स्कूल पहुँचने पर उनका किसी नायक की तरह स्वागत किया गया।"
मैट्रिक्स फाइट नाइट (MFN) 18 में इंडोनेशिया के एंगा हंस को पहले ही राउंड में नॉकआउट (TKO) कर इतिहास रचने वाले दिगंबर सिंह रावत अपने पुराने स्कूल श्री गुरु राम राय (SGRR) पब्लिक स्कूल पहुंचे। आदिबद्री और कर्णप्रयाग स्थित उनके स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों ने ढोल-दमाऊ की थाप पर उनका ज़ोरदार स्वागत किया।
इस भावुक मुलाकात के दौरान दिगंबर ने अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे सीमित संसाधनों और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद अनुशासन और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि पहाड़ की कठिनाइयां ही हमारी असली ताकत हैं।
- उपलब्धि: 2 मई 2026 को MFN लाइटवेट वर्ल्ड टाइटल जीता।
- मूल निवास: गैरसैंण (चमोली) के आली गाँव के रहने वाले हैं।
- भविष्य का लक्ष्य: भारत का प्रतिनिधित्व करना और दुनिया की सबसे बड़ी फाइटिंग लीग UFC में तिरंगा लहराना।
"दिगंबर की इस जीत ने न केवल उत्तराखंड का मान बढ़ाया है, बल्कि पहाड़ के युवाओं के लिए एक नई राह भी खोली है। गैरसैंण की तंग गलियों से निकलकर रिंग के ग्लोबल मंच तक का उनका सफर 'पहाड़ी जज्बे' की मिसाल है।"

