All India tv news। देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब राज्य के प्रत्येक जूनियर हाईस्कूल (कक्षा 6 से 8) में कम से कम 4 शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य की जाएगी।
मुख्य बिंदु :-
- शिक्षकों की संख्या में वृद्धि: अब तक कई जूनियर हाईस्कूलों में केवल 2 या 3 शिक्षक ही कार्यरत थे, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता था।
- अंग्रेजी के लिए अलग पद: पहली बार जूनियर स्तर पर अंग्रेजी विषय के लिए अलग से पद सृजित करने की तैयारी चल रही है।
- विषयवार विशेषज्ञता: अब गणित, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन और भाषा (विशेषकर अंग्रेजी) के अलग-अलग विशेषज्ञ शिक्षक छात्रों को उपलब्ध होंगे।
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को निजी स्कूलों की तर्ज पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है।
छात्रों और अभिभावकों को क्या होगा फायदा?
सरकार के इस फैसले से छात्रों को अब विषयों को रटने के बजाय समझने का मौका मिलेगा। उत्तराखंड शिक्षा निदेशालय के अनुसार, अंग्रेजी के विशेष पद सृजित होने से सरकारी स्कूलों के बच्चे भी अब प्रतियोगी परीक्षाओं और आधुनिक संचार कौशल में आगे निकल सकेंगे। शिक्षकों की संख्या बढ़ने से प्रशासनिक कार्यों का बोझ भी कम होगा, जिससे वे पूरा ध्यान केवल बच्चों की पढ़ाई पर लगा पाएंगे।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जूनियर हाईस्कूल शिक्षा की नींव होते हैं। यहाँ शिक्षकों की कमी पूरी होने से स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट में कमी आएगी और सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ने की पूरी उम्मीद है। सरकार का यह कदम नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

