All India tv news। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से इस वक्त की सबसे बड़ी और बेहद विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। वर्षवार नर्सिंग भर्ती की मांग को लेकर पिछले 5 महीने से शांत बैठा बेरोजगारों का आंदोलन अब उग्र और जानलेवा रूप ले चुका है। देहरादून के परेड ग्राउंड में स्थिति उस समय बेकाबू हो गई, जब आंदोलनकारी युवाओं के समर्थन में पानी की टंकी पर चढ़ी उत्तराखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आत्मदाह का प्रयास किया। इस खौफनाक कदम को देखते ही नीचे मौजूद पुलिस बल और खुफिया तंत्र के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में साथी प्रदर्शनकारियों ने उनके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीनी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। आखिर क्यों उत्तराखंड के युवाओं को अपनी जान दांव पर लगानी पड़ रही है?
देहरादून का परेड ग्राउंड मंगलवार को छावनी में तब्दील हो गया। नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले बेरोजगारों का धरना प्रदर्शन 159वें दिन और आमरण अनशन 24वें दिन भी जारी रहा। लेकिन सरकार की कथित अनदेखी से नाराज होकर सोमवार सुबह 5 बजे ही महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, चार नर्सिंग अभ्यर्थियों (कविता, विनोद, आनंद और धर्मेंद्र) के साथ सर्वे चौक के पास जल संस्थान की ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गई थीं। लगभग 50 घंटों से ये सभी बिना खाए-पिए टंकी के ऊपर डटे हुए हैं।
मंगलवार शाम को जब सरकार की तरफ से कोई भी सुध लेने नहीं पहुंचा, तो ज्योति रौतेला भावुक हो गईं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव आकर सरकार के रवैये को अहंकारी बताया और अचानक खुद पर पेट्रोल उड़ेल दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नीचे खड़े लोग और पुलिस चीखते-चिल्लाते नजर आ रहे हैं। पुलिस लगातार लाउडस्पीकर से उन्हें नीचे उतरने की अपील कर रही है, लेकिन आंदोलनकारी झुकने को तैयार नहीं हैं।
मुख्य मांगें :-
- वर्षवार (Year-wise) चयन प्रक्रिया: नर्सिंग भर्ती को लिखित परीक्षा की जगह पहले की तरह वरिष्ठता (सीनियरिटी) के आधार पर बहाल किया जाए.
- पदों की बहाली: IPHS मानकों के अनुसार पूर्व की भांति 2000 पदों पर वर्षवार भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू हो.
- स्थायी नियमावली: बार-बार नियमों को बदलने के बजाय नर्सिंग नियमावली को स्थायी रूप से लागू किया जाए.
- प्रशासनिक हलचल :-
इस घटना के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत, हरक सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी बेरोजगारों को समर्थन देने ग्राउंड पर उतर आए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे को ले जाने का आश्वासन दिया था, लेकिन आंदोलनकारियों ने इस "आश्वासन की पुड़िया" को सिरे से खारिज कर दिया है और बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक के फैसले तक टंकी से नीचे उतरने से मना कर दिया है.

