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साहस को सलाम: रुद्रप्रयाग में 64 साल की बुजुर्ग महिला ने दरांती से गुलदार को खदेड़ा, बचाई जान।

 


All India tv news।  रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के पहाड़ों से एक बार फिर हैरान और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि विकासखंड के अंतर्गत कोटी गांव में एक 64 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए साक्षात मौत को मात दे दी। जंगल में घास काटने गई महिला पर अचानक एक खूंखार गुलदार (तेंदुए) ने हमला कर दिया। लेकिन महिला डरी नहीं, बल्कि अपनी दरांती से गुलदार पर ऐसा पलटवार किया कि शिकारी खुद जान बचाकर भागने पर मजबूर हो गया।



पूरी घटना: घास काटने गई महिला पर घात लगाकर हमला :-
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार , कोटी गांव की रहने वाली 64 वर्षीय नारायणी देवी रोज की तरह जंगल में घास काटने गई थीं। तभी झाड़ियों में घात लगाकर बैठे एक गुलदार ने उन पर अचानक जानलेवा हमला बोल दिया। गुलदार के हमले से नारायणी देवी जमीन पर गिर गईं। गुलदार उनके ऊपर था, लेकिन इस बेहद डरावने पल में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
दरांती बनी ढाल, गुलदार को भागना पड़ा :-
नारायणी देवी ने बिना घबराए अपने हाथ में मौजूद दरांती (घास काटने का औजार) उठाई और गुलदार पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए। बुजुर्ग महिला के इस जोरदार और साहसी पलटवार से गुलदार घबरा गया। खुद को कमजोर पड़ता देख खूंखार गुलदार महिला को छोड़कर तुरंत घने जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ।
अस्पताल में भर्ती, हालत सामान्य :-
गुलदार के इस हमले में नारायणी देवी के हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद लहूलुहान हालत में उन्हें तुरंत अगस्त्यमुनि के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार किया। राहत की बात यह है कि उनकी हालत अब सामान्य और खतरे से बाहर बताई जा रही है।

ग्रामीणों में आक्रोश, वन विभाग से मांग :-
इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के बाद पूरे कोटी गांव और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि:
  • प्रभावित क्षेत्र में वन विभाग तुरंत गश्त बढ़ाए
  • ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
  • आदमखोर हो रहे गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाए
यह घटना उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक और गंभीर और डरावनी तस्वीर पेश करती है। जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों में आने से ग्रामीणों का जीवन लगातार खतरे में पड़ रहा है।

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