All India tv news। बिहार के गया से इस वक्त की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। कहते हैं कि 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय'। ऐसा ही कुछ सच साबित हुआ है गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के रघुनाथ नगर गांव में। जहाँ 300 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिरे 4 साल के मासूम पीयूष कुमार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। करीब 7 घंटे तक चले इस रोंगटे खड़े कर देने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार मौत हार गई और मासूम की जिंदगी जीत गई!
पूरी रात प्रशासन, NDRF और SDRF की टीमों ने किस तरह युद्ध स्तर पर अभियान चलाया और कैसे पीयूष को नई जिंदगी मिली, देखिए हमारी इस खास रिपोर्ट में।
गहरी खाई में फंसे पीयूष तक सबसे पहले पाइप के जरिए ऑक्सीजन पहुँचाई गई। इसके बाद हाई-टेक सीसीटीवी कैमरा बोरवेल के अंदर डाला गया ताकि बच्चे की हर हरकत पर नजर रखी जा सके। बच्चा घबराए नहीं, इसके लिए रेस्क्यू टीम ने एक बेहद भावुक और सटीक रणनीति अपनाई। पाइप के ही माध्यम से पीयूष की बात उसकी माँ से कराई गई। माँ की ममता भरी आवाज़ ने उस अंधेरी सुरंग में भी मासूम का हौसला टूटने नहीं दिया।
समय बीत रहा था, धड़कनें बढ़ रही थीं। बाहर पोकलेन मशीनों से समानांतर गड्ढा खोदा जा रहा था। आखिरकार, रात के 1 बजकर 50 मिनट पर रेस्क्यू टीम ने हुक सिस्टम और अपनी सूझबूझ से पीयूष को सकुशल बाहर खींच लिया। जैसे ही एनडीआरएफ के जवान पीयूष को गोद में लेकर बाहर निकले, पूरे इलाके में भारत माता की जय और तालियों की गड़गड़ाहट गूंज गई।
पीयूष को बाहर निकालने के तुरंत बाद फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसकी स्थिति पूरी तरह सामान्य और स्थिर बताई है। लेकिन इस सुखद अंत के बीच एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि आखिर बार-बार हिदायत के बाद भी लोग बोरवेल को खुला क्यों छोड़ देते हैं? पुलिस ने इस मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने की बात कही है। फिलहाल, हम NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी को सलाम करते हैं, जिनकी वजह से आज पीयूष अपने माता-पिता की गोद में सुरक्षित है।

