All India tv news। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक बेहद ही दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। कपकोट के शिवालय क्षेत्र में उफनती सरयू नदी के तेज बहाव में बहे 8 वर्षीय मासूम राकेश सिंह का शव घटना के पांचवें दिन बरामद कर लिया गया है। पांच दिनों से टकटकी लगाए बैठे परिजनों की उम्मीदें अब पूरी तरह से टूट चुकी हैं और पूरे परिवार में इस वक्त चीख-पुकार मची हुई है।
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र में बीते सोमवार को सावन के पहले सोमवार के दिन एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ था। लाहुर गांव निवासी नारायण सिंह का 8 वर्षीय पुत्र राकेश सिंह अपनी मां कमला देवी के साथ शिवालय स्थित शिव मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक के लिए आया था। इसी दौरान नदी के किनारे पानी भरते समय पैर फिसलने या अचानक आए तेज बहाव के कारण वह उफनती सरयू नदी की तेज धारा में बह गया।
5 दिनों तक चला महा-सर्च ऑपरेशन:-
घटना की गंभीरता को देखते हुए बागेश्वर पुलिस प्रशासन, NDRF, SDRF, फायर सर्विस और स्थानीय पुलिस की टीमों ने तुरंत संयुक्त मोर्चा संभाला। नदी के भारी उफान, तेज बहाव और पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पुलिस ड्रोन विंग की मदद से लगातार 5 दिनों तक बिना रुके सघन तलाशी अभियान चलाया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए बागेश्वर पुलिस प्रशासन, NDRF, SDRF, फायर सर्विस और स्थानीय पुलिस की टीमों ने तुरंत संयुक्त मोर्चा संभाला। नदी के भारी उफान, तेज बहाव और पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पुलिस ड्रोन विंग की मदद से लगातार 5 दिनों तक बिना रुके सघन तलाशी अभियान चलाया गया।
कस्तूरबा गांधी विद्यालय के पास मिला शव:-
शुक्रवार को यह खोजबीन तब समाप्त हुई जब मासूम राकेश का शव घटनास्थल से दूर असौं गांव के समीप कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के सामने नदी से बरामद किया गया। बालक के ताऊ खीम सिंह ने शव की शिनाख्त की, जिसके बाद रेस्क्यू टीमों ने शव को नदी से बाहर निकाला।
शुक्रवार को यह खोजबीन तब समाप्त हुई जब मासूम राकेश का शव घटनास्थल से दूर असौं गांव के समीप कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के सामने नदी से बरामद किया गया। बालक के ताऊ खीम सिंह ने शव की शिनाख्त की, जिसके बाद रेस्क्यू टीमों ने शव को नदी से बाहर निकाला।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल:-
पिछले पांच दिनों से इस आस में बैठे माता-पिता कि शायद उनका लाडला सही-सलामत मिल जाए, शव देखते ही बिलख पड़े। मां कमला देवी और पिता नारायण सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे लाहुर गांव में मातम का माहौल है। स्थानीय प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार को आपदा नियमों के तहत मुआवजा देने की बात भी कही गई है।
पिछले पांच दिनों से इस आस में बैठे माता-पिता कि शायद उनका लाडला सही-सलामत मिल जाए, शव देखते ही बिलख पड़े। मां कमला देवी और पिता नारायण सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे लाहुर गांव में मातम का माहौल है। स्थानीय प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार को आपदा नियमों के तहत मुआवजा देने की बात भी कही गई है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर पहाड़ों में मानसून के दौरान नदियों के रौद्र रूप और उनसे होने वाले खतरों को उजागर किया है।

