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राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

10 महीने की 'नन्ही परी' ने दुनिया को सिखाया इंसानियत का पाठ, जाते-जाते 5 लोगों को दे गई नई ज़िंदगी।



 All India tv news। आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो आपके दिल को झकझोर देगी, लेकिन साथ ही आपको गर्व से भर देगी। यह कहानी है 10 महीने की एक नन्ही सी जान 'आलिन' की, जिसने अपनी छोटी सी उम्र में वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े लोग पूरी ज़िंदगी में नहीं कर पाते। एक दर्दनाक हादसे के बाद जब डॉक्टरों ने उसे 'ब्रेन डेड' घोषित किया, तो उसके माता-पिता ने अपने कलेजे के टुकड़े को खोने के गम के बीच एक ऐसा फैसला लिया जिसने 5 और परिवारों के बुझते हुए चिरागों को रौशन कर दिया।"

घटना की पृष्ठभूमि:- केरल के मल्लापल्ली की रहने वाली 10 महीने की आलिन शेरिन अब्राहम एक सड़क हादसे का शिकार हो गई थी। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद, कोच्चि के अमृता अस्पताल में उसे 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया गया।

ऐतिहासिक फैसला:- इस गहरे दुख की घड़ी में आलिन के माता-पिता, अरुण अब्राहम और शेरिन एन जॉन, ने साहस का परिचय देते हुए अपनी बेटी के अंग दान करने का फैसला किया।

बचाई गई जानें:- आलिन के लीवर, किडनी, हार्ट वाल्व और आंखों (कॉर्निया) को दान किया गया। इनमें से उसका लीवर एक 6 महीने के बच्चे को ट्रांसप्लांट किया गया, जो राज्य का सबसे कम उम्र का लीवर प्राप्तकर्ता बना। इस तरह आलिन ने जाते-जाते 5 लोगों को नई जिंदगी का उपहार दिया।

राजकीय सम्मान:- इस सर्वोच्च बलिदान और इंसानियत की मिसाल के लिए केरल सरकार ने आलिन को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी इस परिवार के साहस की सराहना करते हुए इसे मानवता के लिए एक प्रेरणा बताया।

"आलिन आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी धड़कनें किसी और के सीने में धड़क रही हैं, और उसकी आँखों से कोई और इस दुनिया को देख रहा है। भारत में अंगदान की दर आज भी बहुत कम है, जहाँ लाखों लोग हर साल ट्रांसप्लांट के इंतज़ार में दम तोड़ देते हैं। ऐसे में आलिन और उसके माता-पिता का यह फैसला समाज के लिए एक मशाल की तरह है। इस नन्ही परी को हमारा कोटि-कोटि नमन।"

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