All India tv news। अक्सर कहा जाता है कि 'बातों का क्या, बातें तो होती रहती हैं', लेकिन छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक गांव ने इस कहावत को पूरी तरह बदल दिया है। अगर आप इस गांव की चौपाल पर बैठकर किसी की बुराई या चुगली करते हैं, तो यह हंसी-मजाक आपको बहुत भारी पड़ सकता है। हम बात कर रहे हैं मेड़की गांव की, जहां अब 'चुगली' करना एक महंगा अपराध बन गया है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक बालोद जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर स्थित मेड़की गांव इन दिनों प्रदेश भर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। गांव की ग्राम समिति ने एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला लेते हुए पूरे गांव को 'नो चुगली ज़ोन' घोषित कर दिया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
दरअसल, कुछ समय पहले गांव में दो पक्षों के बीच जमकर विवाद हुआ था। जब विवाद की जड़ तलाशी गई, तो पता चला कि चौक-चौराहों पर बैठकर की गई एक-दूसरे की बुराई और कानाफूसी ने ही बड़े झगड़े का रूप ले लिया था। आपसी भाईचारे को खत्म होता देख ग्रामीणों ने एक सामूहिक बैठक बुलाई और सर्वसम्मति से इस बुराई को जड़ से खत्म करने का निर्णय लिया।
क्या हैं नए नियम?
जुर्माना: अगर कोई भी ग्रामीण किसी दूसरे की चुगली करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे ₹5,000 का दंड भरना होगा।
प्रतिबंध: सार्वजनिक स्थलों, चौक-चौराहों या किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी करना अब पूरी तरह प्रतिबंधित है।
गवाही: ग्राम समिति ने स्पष्ट किया है कि प्रमाण मिलने पर जुर्माना तुरंत वसूला जाएगा।
नशे पर पहले से है सख्ती:-
आपको बता दें कि मेड़की गांव पहले ही अनुशासन के लिए जाना जाता है। गांव में शराब पीने या बेचने पर ₹10,000 का भारी जुर्माना पहले से ही लागू है। अब चुगली पर इस नई पाबंदी ने गांव को एक 'आदर्श ग्राम' बनाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा दिया है।
ग्रामीणों का मानना है कि जब लोग दूसरों की बुराई करना छोड़ देंगे, तो विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगे और गांव में शांति बनी रहेगी। मेड़की गांव का यह अनूठा प्रयोग उन तमाम इलाकों के लिए एक सबक है जहां आपसी कानाफूसी बड़े विवादों का कारण बनती है।

