expr:class='data:blog.pageType' id='mainContent'>

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

ऐपण के रंगों से चमक रही देवभूमि: अल्मोड़ा की सुजाता बिष्ट ने लोक कला को बनाया रोज़गार का ज़रिया।

 



All India tv news। "हुनर और मेहनत जब मिल जाते हैं, तो परंपराएं न केवल जीवित रहती हैं बल्कि आधुनिक युग में अपनी एक नई पहचान भी बनाती हैं। आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं उत्तराखंड के अल्मोड़ा की एक ऐसी ही बेटी से, जिन्होंने कुमाऊं की पारंपरिक लोक कला 'ऐपण' को अपने जीवन का मिशन बना लिया है। सुजाता बिष्ट न केवल इस कला को सहेज रही हैं, बल्कि अपनी संस्था के माध्यम से इसे सात समंदर पार तक पहुँचा रही हैं।"

उत्तराखंड की संस्कृति में ऐपण का स्थान बेहद खास है। मांगलिक कार्यों में देहरी और आंगन को सजाने वाली यह कला अब कागज़ और कैनवास से निकलकर आधुनिक उत्पादों का हिस्सा बन गई है। अल्मोड़ा की रहने वाली सुजाता बिष्ट ने अपनी कड़ी मेहनत से इस पारंपरिक कला को एक नई ऊंचाई दी है।

सुजाता 'कुमाऊं ऐपण' (Kumaon Aipan Facebook Page) नाम की संस्था चलाती हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य विलुप्त होती इस कला को पुनर्जीवित करना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। सुजाता के बनाए उत्पादों में पारंपरिक चौकियों से लेकर आधुनिक जूट बैग, डायरी, नेमप्लेट और वॉल हैंगिंग शामिल हैं।

मुख्य आकर्षण:-

कला का प्रदर्शन:- सुजाता केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित प्रदर्शनियों में अपनी कला का लोहा मनवा चुकी हैं।

घर बैठे ऑर्डर:- उनकी कला अब डिजिटल भी हो गई है। ग्राहक सोशल मीडिया के माध्यम से कुमाऊँ ऐपन पर सीधे संपर्क कर अपने पसंदीदा ऐपण उत्पाद घर मंगा सकते हैं।

रोज़गार के अवसर:- अपनी संस्था के ज़रिए वे स्थानीय महिलाओं को इस कला का प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं।

सुजाता बिष्ट जैसी कलाकार आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं। जहाँ एक ओर लोग आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों को भूल रहे हैं, वहीं सुजाता ने दिखा दिया है कि यदि हुनर हो, तो अपनी संस्कृति को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया जा सकता है।




एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.