All India tv news। उत्तराखंड के लोक संगीत के एक युग का आज अंत हो गया। देवभूमि के लोकप्रिय और दिग्गज लोक गायक दीवान सिंह कनवाल जी के आकस्मिक निधन की दुखद खबर से पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन को उत्तराखंड संगीत जगत के लिए एक अत्यंत पीड़ादायक घटना और अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।
कुमाऊंनी संगीत के स्तंभ थे 'दीवान दा' :-
अल्मोड़ा की वादियों से निकलकर अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाले दीवान कनवाल जी ने करीब 100 से ज्यादा कुमाऊंनी गीतों को अपनी आवाज दी थी। उनके सुरों का जादू आज भी पहाड़ों के हर घर में गूंजता है। उन्होंने न केवल गायन, बल्कि अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ी थी। अल्मोड़ा के ऐतिहासिक लक्ष्मी भंडार (हुक्का क्लब) की रामलीला में मंदोदरी के पात्र से उन्होंने अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी।
सफर और उपलब्धियां:-
शुरुआत:- उन्होंने अपनी शिक्षा अल्मोड़ा और द्वाराहाट से पूरी की और 1980 में पहली बार आकाशवाणी नजीबाबाद से लोकगीत गायन की शुरुआत की।
सम्मान:- अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने 'बी ग्रेड' गायक का दर्जा हासिल कर लिया था, जिससे उनका संगीत सफर परवान चढ़ा।
विरासत:- पहाड़ों की संस्कृति और लोकगीतों को संजोने में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। हाल ही में वे अपने नए कुमाऊंनी गीतों पर भी काम कर रहे थे।
श्रद्धांजलि:-
उनके निधन की खबर मिलते ही सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और संगीतकारों द्वारा श्रद्धांजलि देने का तांता लगा हुआ है। भगवान "दीवान दा" की पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करें।

