All India tv news। उत्तराखंड के हल्द्वानी से शिक्षा व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। जहाँ एक तरफ सरकार 'बेहतर शिक्षा' के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हल्द्वानी के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाई का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है। वजह है—शिक्षकों की जनगणना और बीएलओ (BLO) ड्यूटी में तैनाती। हालत यह है कि सैकड़ों बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी अब महज एक या दो शिक्षकों के कंधों पर टिकी है।
हल्द्वानी ब्लॉक के प्राइमरी स्कूलों में इन दिनों सन्नाटा और अव्यवस्था का माहौल है। यहाँ के स्कूलों में शिक्षकों का टोटा इस कदर है कि प्रधानाचार्यों के हाथ-पांव फूल रहे हैं।
मुख्य उदाहरण:-
राजपुरा प्राइमरी स्कूल: यहाँ 215 बच्चों को पढ़ाने के लिए 9 शिक्षक नियुक्त हैं। लेकिन हकीकत देखिए—5 शिक्षक जनगणना में हैं, 2 बीएलओ ड्यूटी पर और 1 मेडिकल लीव पर। नतीजा? 215 बच्चों की पढ़ाई, दाखिला प्रक्रिया, मिड-डे मील और स्कूल का सारा कागजी काम सिर्फ एक अकेली शिक्षिका संभाल रही हैं।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय:- यहाँ 262 बच्चों के बीच 9 में से 5 शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव और जनगणना कार्यों में लगा दी गई है।
अन्य स्कूलों का हाल:- रेलवे काठगोदाम, कन्या काठगोदाम और तुलसी नगर जैसे स्कूलों में केवल 2-2 शिक्षक थे, जिनमें से भी एक-एक की ड्यूटी लगा दी गई है। बनभूलपुरा में तो 4 में से 3 शिक्षक फील्ड पर हैं।
शिक्षक संघ का पक्ष :-
प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष मदन सिंह बर्थवाल का कहना है कि विभाग ने जमीनी हकीकत जाने बिना ही थोक में शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी है, जिससे शिक्षण कार्य पूरी तरह ठप होने की कगार पर है।
प्रशासन का तर्क :-
हालाँकि, प्रशासन इस बदहाली को स्वीकार करने के बजाय बचाव की मुद्रा में है। खंड शिक्षाधिकारी तारा सिंह का कहना है कि कोई स्कूल बंद नहीं हुआ है और करीब 70% स्कूलों से शिक्षकों की ड्यूटी ली जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जहाँ ज्यादा दिक्कत है, वहां जिलाधिकारी के निर्देश पर समाधान निकाला जाएगा।
सवाल यह है कि जब शिक्षक जनगणना के आंकड़े जुटाने में व्यस्त होंगे, तो क्लास में बच्चों के भविष्य का आंकड़ा कौन सुधारेगा? वर्तमान में स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है, लेकिन शिक्षकों की कमी ने विषयवार पढ़ाई को एक बड़ी चुनौती बना दिया है।

