All India tv news। उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सफर अब और भी सुरक्षित होने जा रहा है। ट्रैफिक निदेशालय ने इस साल विशेष तैयारी की है, जिसके तहत यात्रा मार्गों के सभी संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन और बोटलनेक क्षेत्रों की मैपिंग गूगल के साथ मिलकर की गई है।
सीधा अलर्ट:- यदि यात्रा मार्ग पर कहीं भी लैंडस्लाइड होता है या भीषण जाम लगता है, तो गूगल मैप इस्तेमाल कर रहे श्रद्धालुओं को तुरंत नोटिफिकेशन/अलर्ट मिल जाएगा।
10 किमी का सुरक्षा घेरा:- देहरादून में एक केंद्रीय कंट्रोल रूम बनाया गया है। जैसे ही किसी पहाड़ी जनपद से जाम या मलबे की सूचना मिलेगी, यात्रा मार्ग पर मौजूद हर 10 किलोमीटर के दायरे में सर्विस प्रोवाइडर्स के जरिए यात्रियों को अलर्ट मैसेज भेज दिया जाएगा।
क्यूआर कोड सुविधा:- ट्रैफिक निदेशालय यात्रियों के लिए विशेष क्यूआर कोड स्कैनर भी तैयार कर रहा है, जिससे वे वैकल्पिक रास्तों और ट्रैफिक की ताजा स्थिति की जानकारी ले सकेंगे।
स्मार्ट ट्रैफिक प्लान:- अत्यधिक भीड़ की स्थिति में पुलिस ने प्लान A, B और C तैयार किए हैं। हरिद्वार और देहरादून जैसे मुख्य प्रवेश द्वारों पर वाहनों का दबाव बढ़ने पर यात्रियों को 'होल्डिंग स्थानों' और पार्किंग में रोका जाएगा।
लैंडस्लाइड के संवेदनशील इलाके:-
प्रशासन ने ऋषिकेश से बद्रीनाथ और केदारनाथ तक के मार्ग पर लगभग 55 संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों की पहचान की है, जिनमें जोशीमठ, पागलनाला, लाम्बगड़ और पीपलकोटी जैसे इलाके शामिल हैं।
यात्रियों के लिए सलाह:-
यात्रा शुरू करने से पहले गूगल मैप पर रूट चेक जरूर करें।
प्रशासन द्वारा जारी वैकल्पिक मार्गों का पालन करें ताकि अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
मौसम विभाग के ऑरेंज या रेड अलर्ट के दौरान यात्रा करने से बचें।
यात्री पंजीयन :-
2026 की यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। श्रद्धालु उत्तराखंड पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।

